सोनिया गांधी पर कुमारस्वामी का तीखा हमला, राष्ट्रीय गीत विवाद में बढ़ी राजनीतिक गर्मी

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। बीजेपी और जेडीएस नेताओं ने कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के बयान ने मामले को और गर्मा दिया है।
कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी पर साधा निशाना
कर्नाटक के हासन में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी “मूर्खतापूर्ण कारण” देकर खुद को नहीं बचा सकतीं, क्योंकि देश की जनता सब कुछ देख रही है।
कुमारस्वामी ने कहा कि सोनिया गांधी भारत आईं, यहां रहीं और राजनीति में सक्रिय हुईं, लेकिन उनके बयान और फैसलों को लेकर जनता सवाल पूछ रही है। उनके इस बयान के बाद नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया दोहरे रवैये का आरोप
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है।
रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् के पूरे गायन को लेकर असहज थीं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस पर सफाई देते हुए कहा गया था कि सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए बैठने की व्यवस्था कर रही थीं।
कांग्रेस की सफाई पर बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने कांग्रेस के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल बहाना है। रविशंकर प्रसाद ने गोवा में हुए कांग्रेस कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जहां कथित तौर पर वंदे मातरम् के सीमित हिस्से का गायन हुआ था।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस का राष्ट्रीय गीत को लेकर वास्तविक रुख क्या है।
स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर सियासत
बीजेपी नेताओं ने कहा कि वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का अहम हिस्सा रहा है और इसकी ऐतिहासिक भूमिका को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर अपना एकाधिकार जताने की कोशिश करती है, जबकि इतिहास में सभी योगदानों को सम्मान मिलना चाहिए।
विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
वंदे मातरम् विवाद अब सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा राष्ट्रीय पहचान, इतिहास और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़ी बहस का रूप ले चुका है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच यह राजनीतिक टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।





