यूपी में BJP का मिशन-2027: कमजोर सीटों पर माइक्रो मैनेजमेंट, 18,900 बूथों पर खास रणनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। लखनऊ में प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक कर कमजोर सीटों और बूथों की समीक्षा की। पार्टी अब सिर्फ यह जानना नहीं चाहती कि कहां हारी, बल्कि हर कमजोर क्षेत्र के लिए आगे की रणनीति भी तैयार कर रही है।
‘कहां हारे, क्यों हारे और अब क्या करेंगे?’
लखनऊ में हुई बैठक का फोकस चुनावी प्रदर्शन के साथ संगठन की जमीनी स्थिति पर रहा। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, तावड़े ने क्षेत्रीय पदाधिकारियों से स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाने और संगठन की कमियों को दूर करने पर जोर दिया। पार्टी के भीतर 2024 लोकसभा चुनाव में सामने आई कमजोरियों की समीक्षा भी चल रही है।
यानी समीक्षा का सवाल सिर्फ हार के कारण तक सीमित नहीं है। अब यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित विधानसभा या बूथ पर संगठनात्मक कमजोरी क्या थी और उसे अगले चुनाव से पहले कैसे दूर किया जा सकता है।
2022 बनाम 2024 के आंकड़ों पर नजर
बीजेपी की बूथ स्तर की समीक्षा में 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के अंतर को खास तौर पर देखा जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के आंतरिक आकलन में करीब 18,900 ऐसे बूथ सामने आए हैं, जहां बीजेपी ने 2022 विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में इन बूथों पर पार्टी पीछे चली गई। इनमें करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण क्षेत्रों में बताए गए हैं।
इस समीक्षा में अवध और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान होने की बात सामने आई है। हालांकि इन बूथों के प्रदर्शन में बदलाव के कारण अलग-अलग स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े हो सकते हैं, इसलिए पार्टी क्षेत्रवार रणनीति तैयार करने पर जोर दे रही है।
हर कमजोर सीट के लिए अलग प्लान
बीजेपी की मौजूदा रणनीति में एक ही फॉर्मूले को पूरे प्रदेश में लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से काम करने की बात सामने आई है। जहां संगठन कमजोर है, वहां कार्यकर्ताओं और बूथ संरचना को मजबूत करने पर जोर होगा। जहां मतदाताओं से संपर्क कमजोर हुआ है, वहां जमीनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
इसी तरह विधानसभा स्तर पर उम्मीदवार, स्थानीय नेतृत्व, सामाजिक समीकरण और संगठन के बीच तालमेल जैसे पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, तावड़े ने क्षेत्रीय पदाधिकारियों से स्थानीय वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाने को कहा है।
चार सह-प्रभारियों को भी मिली जिम्मेदारी
बीजेपी ने यूपी के लिए विनोद तावड़े के साथ चार सह-प्रभारी भी नियुक्त किए हैं। इनमें जगदीश ईश्वर पटेल, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा शामिल हैं। पार्टी के मुताबिक, इन नियुक्तियों का उद्देश्य प्रदेश में संगठनात्मक तैयारियों और बूथ प्रबंधन को मजबूत करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदीप वर्मा को अवध और कानपुर-बुंदेलखंड, जगदीश पटेल को काशी, अनंत ओझा को ब्रज और मेधा कुलकर्णी को पश्चिम क्षेत्र के साथ महिला संपर्क कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दी गई है।
योगी और दोनों डिप्टी सीएम से भी मुलाकात
तावड़े ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य तथा ब्रजेश पाठक से भी मुलाकात की। इसके बाद क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा हुई।
बीजेपी की तैयारी में सरकार और संगठन के बीच समन्वय भी अहम हिस्सा है। पार्टी पहले ही सितंबर में ‘सेवा संकल्प’ और ‘सुशासन’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए जमीनी संपर्क बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर चुकी है।
बूथ से शुरू होगी 2027 की चुनावी तैयारी
बीजेपी की मौजूदा कवायद से साफ है कि 2027 की तैयारी विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं रखी जा रही। पार्टी बूथ स्तर के प्रदर्शन में आए बदलाव को समझने और कमजोर क्षेत्रों में संगठन को दोबारा सक्रिय करने पर जोर दे रही है।
18,900 के आसपास कमजोर या पलटे बूथों की समीक्षा इसी माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति का हिस्सा है। अब देखना होगा कि इन बूथों के लिए तैयार की जाने वाली क्षेत्रवार रणनीति आने वाले महीनों में किस तरह जमीन पर लागू होती है।





