68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी अनुप्रिया पटेल से मिले, आठ साल बाद भी नियुक्ति और आरक्षण समाधान की मांग

आठ साल पुरानी 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर लखनऊ की सियासत और शासन के सामने खड़ा है। आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों और खाली पदों पर नियुक्ति की मांग लेकर अभ्यर्थियों ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से मुलाकात की और मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने की अपील की।
8 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ इंतजार
उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 से जुड़े अभ्यर्थियों का संघर्ष अभी जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के प्रावधानों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया, जिसके कारण कई पात्र अभ्यर्थी नियुक्ति से बाहर रह गए। इसी मांग को लेकर वे लगातार सरकार और संबंधित नेताओं से संपर्क कर रहे हैं।
अनुप्रिया पटेल से मिला प्रतिनिधिमंडल
2 अक्टूबर को अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने भर्ती से जुड़ी समस्याओं का ज्ञापन सौंपते हुए उनसे मामले में हस्तक्षेप करने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने मुद्दा उठाने की अपील की।
आरक्षण की 5 प्रतिशत छूट बना मुख्य मुद्दा
विवाद के केंद्र में ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए अर्हता अंकों में 5 प्रतिशत छूट का मुद्दा है। उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने जून 2026 में अपनी पिछली संस्तुति को बरकरार रखते हुए ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत पर उत्तीर्ण मानकर परिणाम संशोधित करने की सिफारिश की थी।
खाली पदों पर नियुक्ति की मांग
अभ्यर्थियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में अभी भी करीब 23 हजार पद खाली हैं, जिनमें लगभग 9 हजार पद ओबीसी वर्ग से जुड़े हैं। ये आंकड़े अभ्यर्थियों की ओर से बताए गए हैं। उनकी मांग है कि आयोग की संस्तुतियों के आधार पर संशोधित चयन सूची जारी हो और पात्र अभ्यर्थियों को खाली पदों पर नियुक्ति दी जाए।
पहले भी कई बार सड़क पर उतरे अभ्यर्थी
यह पहली बार नहीं है जब अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया हो। सितंबर में उन्होंने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर प्रदर्शन कर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों के अनुपालन की मांग की थी। बाद में बीजेपी कार्यालय और मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास के बाहर भी प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।
अब फैसले का इंतजार
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से आश्वासन सुन रहे हैं और अब उन्हें स्पष्ट निर्णय चाहिए। दूसरी ओर, आयोग की संस्तुति के बावजूद अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई और नियुक्ति की प्रक्रिया अलग विषय है। अनुप्रिया पटेल से मुलाकात के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि मामला सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचेगा। आठ साल लंबा यह विवाद अब सिर्फ भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि उन अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल बन चुका है जो आज भी नियुक्ति पत्र की प्रतीक्षा कर रहे हैं।





