राम गोविंद चौधरी का निधन, 8 बार विधायक और नेता प्रतिपक्ष रहे; चंद्रशेखर से जुड़ा था गहरा रिश्ता

उत्तर प्रदेश की समाजवादी राजनीति के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे चौधरी करीब 74 वर्ष के थे। आठ बार विधायक, कई सरकारों में मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र आंदोलन से शुरू होकर प्रदेश की राजनीति के शीर्ष तक पहुंचा।
जेपी आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
राम गोविंद चौधरी का जन्म 1953 में बलिया के गोसाईपुर गांव में हुआ था। छात्र जीवन में ही उनका झुकाव सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों की ओर हो गया था। बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और छात्रसंघ के महामंत्री तथा बाद में अध्यक्ष भी रहे।
आपातकाल के दौरान वह जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े और गिरफ्तार किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने करीब 19 महीने जेल में बिताए। यही दौर उनके राजनीतिक जीवन में संघर्ष और समाजवादी विचारधारा से गहरे जुड़ाव का महत्वपूर्ण अध्याय बना।
जेल से रिहाई के दिन चंद्रशेखर से हुई मुलाकात
राम गोविंद चौधरी के राजनीतिक जीवन से जुड़ा एक चर्चित प्रसंग उनकी चंद्रशेखर से मुलाकात का है। रिपोर्टों के मुताबिक, जेल से रिहा होने के दिन ही चंद्रशेखर लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन करने जा रहे थे। चौधरी जेल से निकलकर पैदल टीडी कॉलेज की ओर बढ़े तो उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जमा हो गए।
चंद्रशेखर का काफिला जब वहां पहुंचा तो उन्होंने भीड़ देखी और चौधरी के बारे में जानकारी ली। इसके बाद दोनों की मुलाकात हुई। यही संबंध आगे चलकर चौधरी के राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण साबित हुआ। चौधरी चंद्रशेखर को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।
1977 में पहली बार बने विधायक
राम गोविंद चौधरी ने 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने कई बार इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। बाद में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र उनकी राजनीतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड और प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, चौधरी कुल आठ बार विधायक रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह से हार के बाद उनका सक्रिय चुनावी सफर थम गया।
मुलायम और अखिलेश सरकार में संभाली मंत्री की जिम्मेदारी
राम गोविंद चौधरी ने समाजवादी राजनीति में रहते हुए मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकारों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं। 1990-91 के दौरान उन्होंने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2003 से 2007 के बीच वह बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के मंत्री रहे।
2012 में बांसडीह से जीत के बाद वह अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री बने। उन्हें बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे विभागों की जिम्मेदारी मिली।
2017 में बने विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष
2017 के विधानसभा चुनाव में बांसडीह सीट से जीत दर्ज करने के बाद राम गोविंद चौधरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। सदन में उनकी पहचान अपने तर्क, आंकड़ों और ग्रामीण मुद्दों को उठाने के अंदाज के लिए बनी।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा के रिकॉर्ड में उनके नाम से 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं। सदन में वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के साथ स्थानीय मुद्दों और आम लोगों की समस्याओं को भी उठाते रहे।
हार के बाद भी राजनीति से जुड़े रहे
2022 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी को बांसडीह सीट पर भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की उम्मीदवार केतकी सिंह से हार मिली। इसके बावजूद उनकी पहचान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में बनी रही। वह सार्वजनिक जीवन और पार्टी की गतिविधियों से जुड़े रहे।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी और बलिया के राजनीतिक क्षेत्र में शोक की प्रतिक्रिया सामने आई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बलिया की राजनीति में लंबे समय तक रही पहचान
राम गोविंद चौधरी की राजनीतिक यात्रा करीब पांच दशकों तक फैली रही। छात्र राजनीति, जेपी आंदोलन, जेल यात्रा, चंद्रशेखर से राजनीतिक संबंध, आठ बार विधानसभा पहुंचना, मंत्री पद और नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी—उनके सार्वजनिक जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ाव रहे।
उनके निधन के साथ बलिया की राजनीति से जुड़ा एक ऐसा चेहरा चला गया, जिसकी पहचान छात्र आंदोलनों से लेकर विधानसभा के लंबे अनुभव तक बनी रही।





