12 बजे तक अली-अली, फिर बजरंग बली’, राजभर का अखिलेश यादव पर तंज

अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होकर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। अब ओम प्रकाश राजभर ने उनके बयान और धार्मिक आयोजन में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर निशाना साधा है, जिससे यूपी की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है।
1. अखिलेश के अयोध्या दौरे से गरमाई सियासत
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए उनकी राजनीति पर सवाल उठाए हैं।
2. भागवत कथा में राजनीति करने का आरोप
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे धार्मिक आयोजनों में भगवान के चरित्र और उनके संदेशों पर चर्चा होनी चाहिए। ऐसे मंचों पर राजनीतिक नारेबाजी और भाषणबाजी करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथा के दौरान राजनीतिक माहौल बनाया गया। राजभर के मुताबिक, धार्मिक आयोजन को राजनीतिक मंच में बदलने की आलोचना करने वाले लोग सही हैं।
3. मुस्लिम तुष्टीकरण को लेकर अखिलेश पर हमला
राजभर ने अखिलेश यादव पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश अपने समर्थकों को बनाए रखने के लिए इस तरह की बयानबाजी करते हैं। हालांकि, ये आरोप राजभर के राजनीतिक बयान हैं। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
4. ‘अली-अली से बजरंगबली’ वाले बयान पर चर्चा
अखिलेश पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा, ‘12 बजे तक तो वो अली-अली बोलते हैं, 12 बजे के बाद जब-तब बजरंगबली शुरू हो जाते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की राजनीति से न तो अली का समर्थन मिलेगा और न ही बजरंगबली का। उनके इस बयान ने धार्मिक प्रतीकों और चुनावी राजनीति को लेकर चल रही बहस को फिर हवा दे दी है।
5. अखिलेश ने योगी को दी थी चुनावी चुनौती
दरअसल, 8 अक्टूबर को अखिलेश यादव अयोध्या में सपा नेता और पार्टी के घोषित उम्मीदवार तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी।
अखिलेश ने दावा किया था कि सपा उम्मीदवार घोषित होने के बाद भाजपा अयोध्या में सर्वे करा रही है और उसे नया प्रत्याशी नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री को अपनी जीत पर भरोसा है, तो उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए।
6. धार्मिक आयोजन और चुनावी संदेश पर नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों, जातीय समीकरणों और मतदाता समूहों से जुड़े बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। अयोध्या जैसे धार्मिक और राजनीतिक महत्व वाले शहर में नेताओं की गतिविधियों पर खास नजर रहती है। ऐसे में अखिलेश यादव का दौरा और राजभर की प्रतिक्रिया चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे रहे हैं।
आखिरकार, चुनावी राजनीति में बयान सुर्खियां जरूर बटोरते हैं, लेकिन मतदाताओं का भरोसा केवल आरोपों से नहीं जीता जा सकता। जनता के लिए असली सवाल यही है कि राजनीतिक दल धार्मिक और चुनावी मंचों से आगे बढ़कर विकास, रोजगार और जनसमस्याओं पर कितनी गंभीरता से बात करते हैं।





