राष्ट्रीय

पश्चिम बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट में 16 या 29 अक्टूबर को सुनवाई संभव, नाम जुड़वाने वाली अपीलों को मिल सकती है प्राथमिकता

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई जल्द हो सकती है। कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले लंबित अपीलों के निपटारे की मांग तेज हो गई है। ऐसे में सवाल है कि क्या पात्र मतदाताओं को मतदान का मौका मिल पाएगा?

 पश्चिम बंगाल SIR मामले में जल्द सुनवाई की मांग

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। शुक्रवार को वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने जल्द सुनवाई की मांग रखी। फिलहाल मामला 30 अक्टूबर को सूचीबद्ध था, लेकिन याचिकाकर्ता इसकी तारीख पहले करवाना चाहते हैं।

 16 या 29 अक्टूबर को हो सकती है सुनवाई

वकीलों ने अदालत से आग्रह किया कि मामले को जल्द सुना जाए, क्योंकि नवंबर में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव प्रस्तावित हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह पता करेंगे कि सुनवाई 16 अक्टूबर को संभव है या नहीं। यदि ऐसा नहीं हो पाया, तो 29 अक्टूबर को सुनवाई का विकल्प मौजूद है। हालांकि, तारीख को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

 उपचुनाव में मतदान का अवसर गंवाने का मुद्दा

सुनवाई के दौरान गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मामले पर पहले 5 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उनके मुताबिक, इस देरी के बीच कुछ मतदाता उपचुनाव में मतदान का अवसर गंवा चुके हैं। उन्होंने अदालत से अपील की कि लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए, ताकि पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा हो सके।

नाम जुड़वाने वाली अपीलों को मिल सकती है प्राथमिकता

प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कई अपीलें अभी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं। इस पर CJI ने संकेत दिया कि नाम हटवाने से जुड़ी अपीलों को बाद में सुना जा सकता है, जबकि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मांग वाली अपीलों को पहले प्राथमिकता देने पर विचार किया जा सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां चुनाव होने हैं।

 एक लाख से अधिक अपीलों पर हो चुका है फैसला

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से संबंधित एक लाख से अधिक अपीलों पर फैसला हो चुका है। इनमें 93 प्रतिशत आवेदकों को योग्य पाया गया है। यह आंकड़ा लंबित मामलों की गंभीरता को सामने लाता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बाकी अपीलों का निपटारा कब तक होगा और संबंधित मतदाताओं को आगामी चुनावों में मतदान का अवसर मिलेगा या नहीं।

 मतदाताओं के अधिकार पर टिकी निगाहें

कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले SIR मामले का निपटारा राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों लिहाज से अहम हो सकता है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि ट्रिब्यूनल को लंबित अपीलों पर निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय मिले। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और संभावित निर्देशों पर टिकी हैं।

निष्कर्ष: मतदाता सूची में नाम होना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी की बुनियादी शर्त है। सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनौती यह है कि चुनावी प्रक्रिया समय पर आगे बढ़े और किसी भी पात्र मतदाता को केवल लंबित अपील के कारण अपने मताधिकार से वंचित न होना पड़े।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

Discover more from Media Auditor

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue Reading

%d