बदायूं विधानसभा सीट 2027: BJP लगाएगी जीत की हैट्रिक या सपा करेगी वापसी?

उत्तर प्रदेश की बदायूं विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने के संकेत हैं। पिछले चुनावों का इतिहास बताता है कि यहां BJP, सपा और BSP के बीच मुकाबला कई बार दिलचस्प रहा है। ऐसे में पुराने नतीजे आगामी चुनाव की तस्वीर समझने में मदद कर सकते हैं।
बदायूं सीट पर किसका रहा दबदबा?
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की बदायूं विधानसभा सीट लंबे समय से BJP और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मुकाबले का प्रमुख केंद्र रही है। उपलब्ध चुनावी इतिहास के मुताबिक, 1991 से 2022 तक हुए आठ चुनावों में BJP ने पांच बार, सपा ने दो बार और BSP ने एक बार जीत दर्ज की। 2027 में BJP की नजर लगातार तीसरी जीत पर होगी, जबकि सपा अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ वापस हासिल करने की कोशिश करेगी।
1991 में BJP ने दोहराई जीत
1991 के विधानसभा चुनाव में BJP ने कृष्ण स्वरूप पर दोबारा भरोसा जताया। उनका मुकाबला जनता दल के खालिद परवेज और कांग्रेस के तिलक से था। नतीजों में कृष्ण स्वरूप को 41,123 वोट मिले, जबकि खालिद परवेज 32,273 वोट हासिल कर सके। BJP ने 8,850 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम ने बदायूं में पार्टी की स्थिति मजबूत की।
1993 में सपा ने पलट दिया खेल
1993 का चुनाव बेहद करीबी रहा। BJP ने फिर कृष्ण स्वरूप को मैदान में उतारा, जबकि सपा की ओर से जोगेंद्र सिंह उम्मीदवार बने। मुकाबले में सपा ने महज 728 वोटों से जीत हासिल कर BJP को झटका दिया। जोगेंद्र सिंह को 40,825 और कृष्ण स्वरूप को 40,097 वोट मिले। यह नतीजा बताता है कि बदायूं में मामूली वोटों का अंतर भी सत्ता का समीकरण बदल सकता है।
1996 में BJP की शानदार वापसी
1996 के चुनाव में BJP ने उम्मीदवार बदलते हुए प्रेम स्वरूप पाठक को टिकट दिया। इस फैसले का पार्टी को फायदा मिला। प्रेम स्वरूप पाठक ने 61,726 वोट हासिल करके सपा के जोगेंद्र सिंह को 15,471 वोटों से हराया। सपा उम्मीदवार को 46,255 वोट मिले, जबकि BSP के फखरे अहमद 27,247 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2002 में BSP ने खोला जीत का खाता
2002 के विधानसभा चुनाव में BSP ने पहली बार बदायूं सीट पर जीत दर्ज की। पार्टी के विमल कृष्ण अग्रवाल ने 36,148 वोट हासिल किए और सपा के जोगेंद्र सिंह को 3,314 वोटों से हराया। BJP के प्रेम स्वरूप पाठक तीसरे स्थान पर रहे। इस नतीजे ने दिखाया कि बदायूं में मुकाबला केवल BJP और सपा तक सीमित नहीं रहा।
2007 में BJP ने फिर मारी बाजी
2007 में प्रदेश में BSP की लहर के बावजूद BJP के महेश चंद्र गुप्ता ने बदायूं सीट जीत ली। उन्हें 36,403 वोट मिले, जबकि सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल को 29,205 वोट हासिल हुए। BJP ने 7,198 वोटों से जीत दर्ज की। यह परिणाम बताता है कि प्रदेशव्यापी राजनीतिक लहर के बावजूद स्थानीय समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं।
2027 में किसके पक्ष में बनेगा माहौल?
बदायूं विधानसभा सीट पर 2027 की लड़ाई में BJP की लगातार तीसरी जीत का लक्ष्य और सपा की वापसी की कोशिश चर्चा के केंद्र में रह सकती है। BSP भी अपने पुराने समर्थन आधार को मजबूत करने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, अंतिम समीकरण उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों, जातीय समीकरणों, संगठन की ताकत और मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेंगे। पुराने नतीजे राजनीतिक पृष्ठभूमि जरूर बताते हैं, लेकिन भविष्य की जीत की गारंटी नहीं देते।





