छुहिया घाटी में पुलिस कस्टडी ब्रेक! ओडिशा पुलिस को घेरकर गांजा तस्कर छुड़ा ले गए बदमाश चार वाहनों में पहुंचे हमलावर, पुलिस वाहन पर हमला कर आरोपी को छुड़ाया; तस्कर नेटवर्क पुलिस से एक कदम आगे या अंदरूनी इनपुट का खेल?

रीवा। रीवा-सीधी सीमा की छुहिया घाटी में हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओडिशा में गांजा तस्करी के मामले में गिरफ्तार आरोपी आदित्य मिश्रा उर्फ सवरिया सेठ को रीवा न्यायालय में पेशी के लिए लाया जा रहा था। इसी दौरान हथियारबंद बदमाशों ने पुलिस वाहन को घेर लिया और हमला कर आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया। घटना के बाद आरोपी को लेकर चल रही पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
फिल्मी अंदाज में हुआ पुलिस कस्टडी ब्रेक
बताया जाता है कि ओडिशा पुलिस की टीम आरोपी आदित्य को लेकर रीवा की ओर आ रही थी। जैसे ही पुलिस वाहन छुहिया घाटी क्षेत्र में पहुंचा, पहले से घात लगाए बदमाशों ने रास्ता रोक दिया। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार हमलावर कई वाहनों में सवार होकर पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस वाहन को निशाना बनाया और आरोपी को छुड़ाकर मौके से फरार हो गए। हमले के दौरान मिर्ची स्प्रे के इस्तेमाल और फायरिंग की बात भी सामने आई है। हालांकि घटना से जुड़े प्रत्येक तथ्य की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आखिर आरोपियों को कैसे पता चली पुलिस की मूवमेंट?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की मूवमेंट को लेकर उठ रहा है। किसी दूसरे राज्य की पुलिस टीम एक गंभीर आपराधिक मामले के आरोपी को लेकर मध्यप्रदेश से गुजर रही थी। ऐसे में आरोपी के साथियों को उसके रास्ते और संभावित समय की जानकारी कैसे मिली?
यदि जांच में यह सामने आता है कि पुलिस की लोकेशन या आरोपी की यात्रा से जुड़ी जानकारी पहले ही बदमाशों तक पहुंची थी तो मामला केवल फरारी का नहीं रहेगा। यह पुलिस के गोपनीय ऑपरेशन की सूचना लीक होने का गंभीर मामला बन सकता है।
तस्कर नेटवर्क कितना मजबूत?
वारदात का तरीका यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या आरोपी का नेटवर्क स्थानीय स्तर पर मजबूत है। पुलिस वाहन को रोकना, हमला करना, आरोपी को छुड़ाना और मौके से निकल जाना किसी सामान्य अपराधी के लिए आसान नहीं माना जा सकता।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना चुनौती है कि हमले की साजिश कहां तैयार हुई इसमें कितने लोग शामिल थे और आरोपियों को पुलिस की गतिविधियों की जानकारी किस माध्यम से मिली।
रीवा-सीधी बॉर्डर पर क्यों चुना गया यही रास्ता?
छुहिया घाटी का चयन भी जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए। अपराधियों ने आरोपी को छुड़ाने के लिए इसी मार्ग को क्यों चुना? क्या उन्हें इलाके की भौगोलिक स्थिति की जानकारी थी? क्या उन्हें भरोसा था कि वारदात के बाद जंगल और पहाड़ी क्षेत्र का फायदा उठाकर आसानी से भागा जा सकता है? इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आना जरूरी है।
जांच के घेरे में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दूसरे राज्य की पुलिस टीम को आरोपी की पेशी के लिए लाते समय मध्यप्रदेश में पर्याप्त सुरक्षा और समन्वय क्यों नहीं मिला। यदि स्थानीय पुलिस को आरोपी की मूवमेंट की जानकारी थी तो संवेदनशील मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा क्यों नहीं दिखाई गई?
हालांकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की है और जांच में कई संदिग्धों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार एक संदिग्ध की गिरफ्तारी भी की जा चुकी है।
अब सिर्फ आरोपी नहीं, पूरे नेटवर्क की तलाश
आदित्य को छुड़ाने की घटना ने पुलिस के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ फरार आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करना है, वहीं दूसरी तरफ उन लोगों तक पहुंचना है जिन्होंने कथित तौर पर पुलिस काफिले पर हमला कर उसे छुड़ाने की योजना बनाई।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है क्या तस्कर नेटवर्क पुलिस से एक कदम आगे चल रहा था या पुलिस की रणनीति से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जानकारी पहले ही उसके पास पहुंच चुकी थी?





