रीवा पुलिस की जेब से फरार हुआ कुख्यात तस्कर! आदित्य को रीवा-मऊगंज में शेर जैसा अभयदान? ईमानदार थाना प्रभारी को ईमानदारी की मिली सजा, लूप लाइन में भेजे जाने पर उठे सवाल

रीवा। रीवा रेंज पुलिस के लिए आदित्य प्रकरण लगातार गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दिन बीतते जा रहे हैं लेकिन गांजा तस्करी से जुड़े आरोपी आदित्य के पुलिस अभिरक्षा से फरार होने के बाद अब तक कई सवाल अनुत्तरित हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक आरोपी पुलिस की कार्रवाई के बीच इतना बेखौफ कैसे था कि उसे छुड़ाने के लिए कथित रूप से हथियारबंद लोग पुलिस जवानों से भिड़ गए?
रीवा-मऊगंज में इतना बेखौफ क्यों था आदित्य?
सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आती रही है कि आदित्य लंबे समय से रीवा मऊगंज और आसपास के इलाकों में सक्रिय था। उसके खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में प्रकरण होने की बात भी सामने आती रही है। इसके बावजूद उसकी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह जांच का विषय है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि उसे रीवा-मऊगंज क्षेत्र में किसी तरह का संरक्षण हासिल था। यदि आरोपी वास्तव में लंबे समय से पुलिस की नजर में था तो फिर उसकी गतिविधियां लगातार कैसे चलती रहीं? क्या स्थानीय स्तर पर किसी ने उसे नजरअंदाज किया या पुलिस की कार्रवाई कहीं कमजोर पड़ गई?
ईमानदारी की सजा या महज संयोग?
मनगवां थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि उन पर आदित्य के मामले में नरमी बरतने का दबाव था लेकिन उन्होंने कथित तौर पर ऐसा करने से इनकार किया। इसके बाद उन्हें थाना प्रभारी की जिम्मेदारी से हटाकर लूप लाइन भेजे जाने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह दावा भी सामने आया है कि तत्कालीन थाना प्रभारी ने पुलिस व्यवस्था के भीतर तस्करों को संरक्षण मिलने जैसी आशंका अधिकारियों के सामने रखी थी। यदि ऐसा हुआ था तो उन शिकायतों पर क्या जांच हुई? किस अधिकारी ने जांच की और उसका परिणाम क्या रहा? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होना जरूरी हैं।
ओडिशा पुलिस ने खोली रीवा पुलिस की पोल?
जब रीवा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे उसी दौरान ओडिशा पुलिस द्वारा आदित्य को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद रीवा पुलिस की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए। यदि दूसरे राज्य की पुलिस किसी ऐसे आरोपी तक पहुंच सकती है जिसके तार रीवा क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
छुहिया घाट ही क्यों चुना गया?
सबसे गंभीर सवाल उस समय को लेकर है जब आदित्य को ओडिशा से रीवा कोर्ट लाया जा रहा था। चूहिया घाट के आसपास पुलिस वाहन को रोककर आरोपी को छुड़ाने की कथित घटना ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया है। यदि पुलिसकर्मियों से मुठभेड़ जैसी स्थिति बनाकर आरोपी को छुड़ाया गया तो यह महज संयोग था या पहले से बनाई गई योजना इसकी जांच जरूरी है। क्या आरोपियों को पुलिस के रूट, समय और वाहन की जानकारी पहले से थी? छुहिया घाट को ही क्यों चुना गया? क्या किसी ने अंदर से जानकारी लीक की? क्या आदित्य के साथियों ने पहले से भागने की पूरी योजना तैयार कर रखी थी? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच से ही सामने आ सकता है।
तस्कर रीवा में पनाह कैसे लेते रहे?
आदित्य और उसके कथित गिरोह से जुड़े लोगों की गतिविधियों को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि वे लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी में सक्रिय थे तो रीवा में उन्हें ठिकाना कैसे मिलता रहा? क्या रीवा और मऊगंज अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है? क्या स्थानीय नेटवर्क पुलिस की निगरानी से बाहर काम कर रहा है?
अब पुलिस से पांच सीधे सवाल
•आदित्य के खिलाफ पहले से उपलब्ध सूचनाओं और प्रकरणों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
•पुलिस वाहन और रूट की जानकारी कथित हमलावरों तक कैसे पहुंची?
•छुहिया घाट पर ही घटना क्यों हुई और क्या रूट की पहले से रेकी की गई थी?
•आदित्य के रीवा-मऊगंज नेटवर्क की जांच में अब तक किन लोगों से पूछताछ हुई?
•क्या पुलिस विभाग के भीतर किसी व्यक्ति ने आरोपी या उसके साथियों को मदद पहुंचाई? यदि हां, तो जिम्मेदार कौन है?





