नशा मुक्त मध्यप्रदेश के लिए CM मोहन यादव सख्त, हॉटस्पॉट पर निगरानी और संयुक्त कार्रवाई के निर्देश

मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ सरकार ने निगरानी और कार्रवाई दोनों तेज करने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को हॉटस्पॉट पर विशेष नजर रखने, हर महीने समीक्षा करने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार काम करने के निर्देश दिए हैं।
नशे के खिलाफ मिशन मोड में सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘नशा मुक्त मध्यप्रदेश’ अभियान को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
हॉटस्पॉट पर रहेगी पैनी नजर
सीएम ने अधिकारियों से कहा कि शहरों और जिलों में नशे के हॉटस्पॉट चिन्हित कर वहां लगातार निगरानी रखी जाए। जरूरत पड़ने पर पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त कार्रवाई करें। अभियान की प्रगति पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर हर महीने समीक्षा बैठक करने को भी कहा गया है।
2706 मामले, 3690 आरोपी
अधिकारियों के प्रेजेंटेशन के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक NDPS Act के तहत मध्यप्रदेश में 2,706 मामले दर्ज किए गए हैं। अगस्त 2026 तक 3,690 आरोपियों से 46,313 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए जाने की जानकारी बैठक में दी गई।
ये आंकड़े सरकारी अधिकारियों की बैठक में प्रस्तुत किए गए हैं और नशे के उत्पादन, कारोबार, सेवन तथा तस्करी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का विवरण देते हैं।
स्कूल-कॉलेज भी निगरानी के दायरे में
सरकार का फोकस केवल नशे के कारोबार पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, शिक्षण संस्थानों की 500 मीटर की परिधि को ड्रग्स फ्री बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रतिबंधित कफ सिरप की जब्ती और नशा मुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने पर भी जोर है।
नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446
नशे से जुड़ी समस्याओं और सहायता के लिए प्रदेश में नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 की व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा ‘नशा मुक्त मित्रों’ के सहयोग से जागरूकता और रोकथाम के प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
कार्रवाई के साथ रोकथाम पर भी जोर
मुख्यमंत्री के निर्देशों में कार्रवाई के साथ रोकथाम, निगरानी, जागरूकता और पुनर्वास को भी महत्व दिया गया है। लगातार जिला स्तरीय समीक्षा से यह देखा जाएगा कि हॉटस्पॉट, शिक्षण संस्थानों और नशा मुक्ति केंद्रों से जुड़े प्रयास कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।
मध्यप्रदेश सरकार का घोषित लक्ष्य नशे के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को एक सतत अभियान के रूप में आगे बढ़ाना है। अब इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से जुड़ी होगी कि निगरानी, कार्रवाई और पुनर्वास के ये प्रयास जमीन पर कितनी निरंतरता से लागू होते हैं।





