उत्तर प्रदेश

राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी दावे पर BJP का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने गिनाए कांग्रेस के चुनावी रिकॉर्ड

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर सवाल उठाए। इसी दौरान उन्होंने भारतीय राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता-विरोधी रुझान के मुद्दे पर भी बात की।

राहुल गांधी ने सवाल किया कि अलग-अलग राज्यों में सरकारों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी देखने को मिलती है, लेकिन BJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मामले में इसका असर क्यों दिखाई नहीं देता। उन्होंने इसके पीछे चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े अपने आरोपों को आधार बनाया।

सुधांशु त्रिवेदी ने दिया जवाब

राहुल गांधी के बयान के बाद BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जवाब दिया। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की और कहा कि कांग्रेस का अपना चुनावी इतिहास एंटी-इनकंबेंसी के सवाल को अलग तरीके से देखने का आधार देता है।

त्रिवेदी ने खास तौर पर उन राज्यों का जिक्र किया, जहां लंबे समय से कांग्रेस की सरकार वापस नहीं आई है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा का चुनावी इतिहास कांग्रेस के लिए लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहा है।

तमिलनाडु और बंगाल का दिया उदाहरण

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस 1967 के बाद से राज्य सरकार में वापस नहीं आई है। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय BJP राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकत नहीं थी।

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1977 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी। इन दोनों उदाहरणों के जरिए त्रिवेदी ने राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी संबंधी तर्क पर सवाल उठाया।

बिहार, यूपी और ओडिशा का भी जिक्र

BJP प्रवक्ता ने बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के चुनावी इतिहास का भी उल्लेख किया। त्रिवेदी के अनुसार बिहार में 1990 के बाद, उत्तर प्रदेश में 1989 के बाद और ओडिशा में 1999 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है।

ये आंकड़े राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से संबंधित हैं। हालांकि, इन राज्यों में सत्ता में कांग्रेस की अनुपस्थिति को सीधे किसी एक कारण से जोड़ना राजनीतिक व्याख्या का विषय है।

SIR और चुनाव आयोग पर भी BJP का जवाब

राहुल गांधी के आरोपों का एक बड़ा हिस्सा चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया से जुड़ा था। BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया।

सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग से संबंधित आरोपों का आधार क्या है और कहा कि मीडिया रिपोर्टों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक तथ्यों को देखा जाना चाहिए। BJP ने SIR की प्रक्रिया को कानूनी और चुनाव आयोग के निर्णयों को बहुमत की सहमति पर आधारित बताया है।

वहीं, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग में कथित मतभेदों से संबंधित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठाए हैं। इन आरोपों और चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।

दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने

इस पूरे विवाद में राहुल गांधी का तर्क चुनावी प्रक्रिया, SIR और BJP के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी से जुड़ा है, जबकि BJP का जवाब कांग्रेस के ऐतिहासिक चुनावी प्रदर्शन और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बचाव पर केंद्रित है।

इसलिए दोनों नेताओं के बयानों को उनके-अपने राजनीतिक पक्ष के संदर्भ में देखना जरूरी है। ऐतिहासिक चुनावी आंकड़े अलग तथ्य हैं, जबकि उनसे निकाली गई राजनीतिक व्याख्याएं संबंधित नेताओं के तर्क का हिस्सा हैं।

SIR विवाद के बीच राहुल गांधी और BJP के बीच चुनाव आयोग तथा एंटी-इनकंबेंसी को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी ने BJP के खिलाफ सत्ता-विरोधी रुझान के सवाल उठाए, जबकि सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के विभिन्न राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के चुनावी रिकॉर्ड का हवाला दिया। अब बहस चुनावी प्रक्रिया, SIR और राजनीतिक दलों के चुनावी प्रदर्शन के इर्द-गिर्द आगे बढ़ रही है।

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