ममता बनर्जी को एक दिन में 3 बड़े झटके, TMC का नाम-सिंबल फ्रीज, उम्मीदवार ने नाम वापस लिया; समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। चुनाव आयोग ने TMC के मूल नाम और चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया। इसके बाद नंदीग्राम की ममता खेमे की उम्मीदवार ने नामांकन वापस लिया और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने के कुछ घंटे बाद उनकी गिरफ्तारी हो गई।
पहला झटका: TMC का नाम और सिंबल फ्रीज
17 सितंबर को चुनाव आयोग ने संगठनात्मक विवाद के बीच ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह मिला, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। ये व्यवस्थाएं आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम हैं; मूल नाम और चिन्ह पर अंतिम विवाद अलग से जारी है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
दूसरा झटका: नंदीग्राम की उम्मीदवार ने नामांकन वापस लिया
नंदीग्राम उपचुनाव में ममता खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। यह घटनाक्रम उनके मुख्यमंत्री और नंदीग्राम से बीजेपी विधायक सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के कुछ घंटों बाद सामने आया।
नामांकन वापस लेने के बाद नंदीग्राम का चुनावी समीकरण फिर बदल गया। ममता बनर्जी के खेमे ने इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।
तीसरा झटका: समर्थन के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार
ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने के कुछ घंटे बाद पुलिस ने उन्हें एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़ा बताया जा रहा है।
गिरफ्तारी के समय और राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस तथा ममता खेमे की ओर से सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के पीछे पुलिस द्वारा दर्ज मामले और आरोपों की कानूनी प्रक्रिया को अलग से देखा जाना होगा।
ममता खेमे ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी और उनके समर्थकों ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। TMC की ओर से इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया गया है और उनकी रिहाई की मांग की गई है।
वहीं, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तारी एक पुराने आपराधिक मामले में हुई है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों और अदालत में होने वाली आगे की कार्रवाई के आधार पर इसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
बीजेपी ने ममता के फैसले पर साधा निशाना
संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे लेकर ममता बनर्जी पर राजनीतिक टिप्पणी की। बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने दावा किया कि ममता खेमे को चुनाव में हार की आशंका थी, इसलिए उम्मीदवार ने नाम वापस लिया।
यह बीजेपी नेता का राजनीतिक दावा है। नामांकन वापस लेने की वास्तविक वजह उम्मीदवार और संबंधित पक्षों के बयानों तथा उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले बदले समीकरण
नंदीग्राम उपचुनाव अब कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच हो रहा है। एक तरफ TMC के मूल नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला है, दूसरी तरफ ममता खेमे की उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने और कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के बाद नया राजनीतिक समीकरण बना है।
इसके बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने विवाद को और बढ़ा दिया है। आगामी दिनों में चुनाव आयोग और अदालतों से जुड़े फैसले तथा उम्मीदवारों की स्थिति इस उपचुनाव की तस्वीर को प्रभावित कर सकती है।





