ओवैसी का RSS-BJP पर हमला, संविधान और मनुस्मृति पर उठाए सवाल

ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी ने संविधान, मनुस्मृति और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले पर असहमति जताते हुए उन्होंने RSS-BJP पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और हैदराबाद की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
हिजाब के फैसले पर ओवैसी की आपत्ति
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब से जुड़े आदेश पर कड़ी असहमति जताई। दारुस्सलाम में आयोजित ‘जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन’ में उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह आदेश इस्लाम और मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में दखल से जुड़ा है।
ओवैसी ने यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आने का इंतजार किया जाना चाहिए। उनके बयान ने एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता और अदालतों के फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
संविधान बनाम मनुस्मृति का मुद्दा
अपने संबोधन में ओवैसी ने RSS और BJP पर संविधान की जगह मनुस्मृति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाए जाने का जिक्र करते हुए संघ के पुराने प्रकाशन में संविधान को लेकर की गई कथित आपत्ति का मुद्दा उठाया।
ओवैसी ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की भूमिका को लेकर भी उस दौर में विरोध की आवाजें सामने आई थीं। हालांकि, इन ऐतिहासिक दावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से अलग-अलग व्याख्याएं रही हैं।
सावरकर और स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र
AIMIM प्रमुख ने अपने भाषण में हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर और स्वतंत्रता आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने सावरकर के जेल से लिखे गए पत्रों का हवाला देते हुए उनकी तुलना मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी से की।
ओवैसी ने दावा किया कि खैराबादी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंग्रेजों के खिलाफ अपना रुख नहीं बदला। इसी दौरान उन्होंने हैदराबाद के मौलवी अलाउद्दीन को अंडमान भेजे गए शुरुआती कैदियों में शामिल बताते हुए मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को रेखांकित किया।
SIR को लेकर भी संदेश
दक्षिणी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया का जिक्र करते हुए ओवैसी ने लोगों से घबराने की अपील नहीं की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम विसंगतियों वाली सूची में आए हैं, वे नोटिस मिलने पर कानूनी प्रक्रिया का सामना करें और परेशान न हों।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि AIMIM के कार्यकर्ता ऐसे मामलों में लोगों के साथ खड़े रहेंगे।
हैदराबाद में ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ की मांग
ओवैसी ने तेलंगाना में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए मदद मांगने में संकोच न करने को कहा।
हैदराबाद में हत्या के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार से समर्पित ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग की। साथ ही हत्या के मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए विशेष अदालतों पर भी जोर दिया।
सियासत से आगे उठते सवाल
ओवैसी के भाषण में धार्मिक स्वतंत्रता, संविधान, ऐतिहासिक विरासत, मतदाता प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दे एक साथ दिखाई दिए। उनके बयानों ने राजनीतिक बहस को जरूर गर्म किया है, लेकिन इन मुद्दों पर तथ्य, संवैधानिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को समझना भी उतना ही जरूरी है।





