रीवा रेंज का कारनामा ! 12 शीशी कोरेक्स, बंद दुकान की छत और आरक्षक सवालों के घेरे में पूरी कार्रवाई

रीवा। रीवा में 12 शीशी कोरेक्स की कथित बरामदगी ने पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। साहू परिवार का आरोप है कि उनके बेटे को व्यक्तिगत रंजिश के चलते फंसाया गया। परिजनों के मुताबिक आरक्षक जावेद के बुलाने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जैसे ही आइसक्रीम की दुकान खोली गई छत के ऊपर रखी 12 शीशी कोरेक्स बरामद कर ली गई। परिवार का दावा है कि उनका बेटा कोरेक्स की बिक्री नहीं करता था और दुकान बंद थी। मामला अब सिविल लाइन थाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। साहू समाज और स्थानीय व्यापारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने शिकायत रखी और IG कार्यालय तक पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की। सवाल यह है कि यदि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार है तो बरामदगी की परिस्थितियों पर उठ रहे सवालों का जवाब जांच के माध्यम से क्यों नहीं दिया जाता?
जावेद की भूमिका पर भी उठे सवाल
परिजनों और स्थानीय लोगों ने कार्रवाई में आरक्षक जावेद की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जावेद की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। अब मांग की जा रही है कि यह भी जांच हो कि सूचना किस आधार पर दी गई पुलिस मौके पर कब पहुंची और बरामदगी से पहले वहां कौन-कौन मौजूद था। स्थानीय स्तर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि आरक्षक जावेद पूर्व में निलंबित हो चुका है। इसके अलावा उसके डांस क्लास संचालित करने की चर्चा भी सामने आ रही है। इन दोनों दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि पूर्व निलंबन का रिकॉर्ड मौजूद है और निजी व्यवसाय संचालित करने का आरोप सही है तो विभागीय नियमों के तहत इसकी भी जांच होना जरूरी है।
सिटी में ही पोस्टिंग क्यों?
आरक्षक जावेद की पोस्टिंग को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। चर्चा है कि वह लंबे समय से सिटी क्षेत्र में ही तैनात रहता है। लोग सवाल कर रहे हैं कि उसकी बार बार सिटी में पोस्टिंग का प्रशासनिक आधार क्या है और क्या उसके निजी कार्यों से इसका कोई संबंध है? यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि सिटी में तैनाती से उसे डांस क्लास संचालित करने में सुविधा मिलती है। हालांकि यह फिलहाल स्थानीय लोगों का आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस विभाग चाहे तो पदस्थापना रिकॉर्ड और ड्यूटी विवरण के जरिए स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
साहू समाज ने IG कार्यालय तक उठाई आवाज
मामले में साहू समाज और स्थानीय व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ अधिकारियों तथा IG कार्यालय पहुंचने से विवाद और गंभीर हो गया है। समाज की मांग है कि जांच स्थानीय स्तर के बजाय वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में हो।
12 शीशियों से बड़ा अब सवाल बरामदगी कैसे हुई?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कोरेक्स की मात्रा नहीं बल्कि बरामदगी की परिस्थितियां बन गई हैं। यदि दुकान बंद थी और पुलिस के पहुंचने के बाद उसे खोला गया तो छत पर रखी शीशियां वहां कब पहुंचीं? पुलिस को सूचना किसने दी? CCTV में क्या रिकॉर्ड हुआ? पंचनामा किन गवाहों की मौजूदगी में बना? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है। नजर अब रीवा रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों पर है। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो कोरेक्स बरामदगी आरक्षक जावेद की भूमिका उसकी पदस्थापना और उसके संबंध में लगाए जा रहे अन्य आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है।





