अंतर्राष्ट्रीय

चीनी की कीमतों में 15.6 फीसदी उछाल, केंद्र ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में किया बड़ा बदलाव

रसोई के बजट पर बढ़ता दबाव अब चीनी की कीमतों में भी साफ दिखाई दे रहा है। एक महीने में खुदरा भाव में करीब 15.6 फीसदी की तेजी आई है। बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियम बदले हैं, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति को बनाए रखा जा सके।

एक महीने में 7.52 रुपये महंगी हुई चीनी

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी एक महीने में भाव 7.52 रुपये प्रति किलो, करीब 15.6 फीसदी बढ़ गया।

यह बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट पर असर डाल रही है। त्योहारों और मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच कीमतों पर नजर और महत्वपूर्ण हो गई है।

सरकार ने TRQ आयात के नियम बदले

केंद्र ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ यानी Tariff Rate Quota आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। पहले आयातित कच्ची चीनी को एक तय अंतिम तारीख, 31 अक्टूबर 2026, तक रिफाइंड करके बेचने की व्यवस्था थी।

अब यह व्यवस्था बदल गई है।

हर खेप के लिए होगी दो महीने की समयसीमा

नए नियम के मुताबिक आयातक को Bill of Entry दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइंड कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचना होगा। यानी अब सभी आयातित खेपों के लिए एक ही अंतिम तारीख नहीं होगी, बल्कि हर खेप की समयसीमा अलग होगी।

इस बदलाव का उद्देश्य आयातित चीनी को घरेलू बाजार में समय पर उपलब्ध कराना माना जा रहा है।

उत्पादन घटने की चिंता

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चीनी उत्पादन में कमी को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक गन्ने की फसल पर अल नीनो परिस्थितियों का असर पड़ा है। इसका प्रभाव केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में कृषि और चीनी उत्पादन पर पड़ा है।

देश में कितना चीनी स्टॉक?

सरकार के मुताबिक भारत की सालाना चीनी जरूरत करीब 280 लाख टन है। प्रल्हाद जोशी ने बताया कि देश में 20-25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। ऐसे में सरकार का फोकस घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर दबाव कम करने पर है।

आम आदमी के लिए क्या मायने?

चीनी की कीमतों में तेजी केवल चाय-कॉफी के खर्च तक सीमित नहीं रहती। मिठाई, बेकरी उत्पाद, पेय पदार्थ और कई खाद्य वस्तुओं की लागत भी इससे प्रभावित होती है। इसलिए सरकार के बदले हुए आयात नियम आने वाले दिनों में बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर कितना असर डालते हैं, यह देखना अहम होगा।

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