कटनी CSP पर 15 लाख मांगने का आरोप, FIR के बाद सस्पेंड; कार्यालय सील

मध्य प्रदेश के कटनी में पुलिस महकमे से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। CSP नेहा पच्चीसिया पर हत्या के आरोपी से कथित तौर पर 15 लाख रुपये मांगने और जमीन की डील में पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। FIR के बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई की है।
CSP के खिलाफ दर्ज हुई FIR
कटनी में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और पद के दुरुपयोग के आरोपों ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। जबलपुर रेंज के IG प्रमोद वर्मा के मुताबिक, कोतवाली थाने में CSP कटनी नेहा पच्चीसिया और दो अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
मामला एक हत्या की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी।
हत्या के आरोपी से 15 लाख मांगने का आरोप
IG के अनुसार, CSP नेहा पच्चीसिया हत्या के एक मामले की जांच कर रही थीं। आरोप है कि उन्होंने मामले के मुख्य आरोपी को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले 15 लाख रुपये की मांग की।
बताया गया कि आरोपी ने रकम देने में असमर्थता जताई। इसके बाद आरोप है कि उसकी जमीन की रजिस्ट्री CSP के किसी करीबी सहयोगी के नाम करवा दी गई।
92 लाख रुपये की डील पर भी सवाल
मामले में जमीन से जुड़ी एक डील का जिक्र भी सामने आया है। आरोप है कि इस डील से संबंधित 92 लाख रुपये की राशि वापस नहीं की गई।
इसके बाद हत्या के आरोपी के बेटे ने शिकायत दर्ज कराई। जबलपुर एसपी अनु बैनीवाल की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की।
मुख्यमंत्री ने दिए सस्पेंड करने के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने CSP नेहा पच्चीसिया को तत्काल सस्पेंड करने के आदेश दिए हैं। FIR दर्ज होने के बाद उन्हें जबलपुर DIG कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।
इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर CSP कार्यालय को भी सील कर दिया गया। कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
ड्राइवर और गनमैन भी निलंबित
मामला सिर्फ CSP तक सीमित नहीं रहा। उनके स्टाफ ड्राइवर और गनमैन को भी सस्पेंड किया गया है। वहीं जांच में लापरवाही के आरोप में दो सब-इंस्पेक्टरों पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
अब पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जिम्मेदारी जबलपुर एसपी अंजना तिवारी को सौंपी गई है।
जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई
कटनी CSP के खिलाफ हुई कार्रवाई ने पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल FIR, निलंबन और विभागीय कार्रवाई के बाद इस मामले पर सबकी नजर बनी हुई है। अब जांच यह तय करेगी कि 15 लाख रुपये की कथित मांग, जमीन की रजिस्ट्री और 92 लाख रुपये की डील के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या था।





