गोरखपुर नगर निगम को ग्लोबल वाटर टेक अवार्ड 2026, जल प्रबंधन मॉडल की हुई सराहना

गोरखपुर ने शहरी जल प्रबंधन में तकनीक और प्रकृति आधारित समाधानों का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। शहर में बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और डिजिटल मॉनिटरिंग के प्रयासों को अब ग्लोबल वाटर टेक अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है।
गोरखपुर को मिला बड़ा सम्मान
गोरखपुर नगर निगम को शहरी जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के लिए GEF Global Water Tech Award 2026 से सम्मानित किया गया है। नगर निगम को यह पुरस्कार Integrated Urban Water Management Project of the Year 2026 श्रेणी में मिला।
शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित Global Water Tech Summit and Award 2026 में महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने सम्मान ग्रहण किया। इस दौरान अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन श्रीवास्तव और सहायक नगर आयुक्त अविनाश प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।
बाढ़ प्रबंधन में तकनीक बनी ताकत
गोरखपुर में शहरी बाढ़ लंबे समय से चुनौती रही है। इसे देखते हुए नगर निगम ने Urban Flood Management Cell (UFMC) बनाया है। इसके जरिए जलस्तर की निगरानी, बारिश के पूर्वानुमान और जल निकासी को एकीकृत किया गया है।
शहर में 110 ऑटोमेटिक वाटर लेवल सेंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा ड्रेनेज नेटवर्क का डिजिटल ट्विन, रियल टाइम मॉनिटरिंग और स्वचालित पंपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है।
21 पंपिंग स्टेशन SCADA से जुड़े
नगर निगम के 25 प्रमुख पंपिंग स्टेशनों में से 21 को SCADA आधारित ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। इससे पंपिंग स्टेशनों की निगरानी और संचालन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
नगर निगम के अनुसार, इन व्यवस्थाओं का असर 2025 के मानसून में भी दिखाई दिया। जलभराव की औसत अवधि करीब 12 घंटे से घटकर डेढ़ घंटे से भी कम रह गई।
वेटलैंड और नैनोबबल तकनीक का इस्तेमाल
गोरखपुर का जल प्रबंधन मॉडल केवल आधुनिक मशीनों तक सीमित नहीं है। नगर निगम ने प्रकृति आधारित समाधानों को भी इसमें शामिल किया है।
तकियाघाट में वेटलैंड विकसित किया गया है, जहां रॉक फिल्टर और स्थानीय वनस्पतियों की मदद से अपशिष्ट जल के उपचार का प्रयास किया जा रहा है। वहीं मोती पोखरा में नैनोबबल और अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए पानी की गुणवत्ता सुधारने पर काम किया जा रहा है।
4 हजार से ज्यादा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
जल संरक्षण के लिए शहर में 4,000 से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। साथ ही 100 से अधिक तालाबों और जल निकायों के पुनर्जीवन का काम किया गया है।
रिचार्ज पिट और बोरवेल रिचार्ज को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सके।
गोरखपुर मॉडल पर हुई चर्चा
समिट में महापौर ने ‘स्मार्ट और सतत जल प्रबंधन’ विषय पर पैनल चर्चा में गोरखपुर का मॉडल साझा किया। उन्होंने बताया कि जलभराव कम करने, जल स्रोतों को बचाने और वर्षा जल के बेहतर इस्तेमाल के लिए तकनीक, प्रकृति आधारित समाधान और जनभागीदारी को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
गोरखपुर को मिला यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि शहर जल संकट और शहरी बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय जरूरतों के मुताबिक आधुनिक और टिकाऊ मॉडल विकसित कर सकता है।





