उत्तर प्रदेश

2027 की तैयारी में BSP, आकाश आनंद ने छेड़ी GenZ पॉलिटिक्स, राहुल-अखिलेश को ‘अंकल’ कहकर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ युवाओं पर फोकस बढ़ गया है। हाथरस की जनसभा में आकाश आनंद ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी। अब सवाल है कि क्या GenZ वोटर BSP की सियासी रणनीति बदल पाएंगे?

हाथरस से BSP ने बजाया चुनावी बिगुल

बहुजन समाज पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करते हुए 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद में बड़ी जनसभा की। मंच से आकाश आनंद ने सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा।

लेकिन उनके भाषण का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा राहुल गांधी और अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहना रहा। यह सिर्फ राजनीतिक तंज नहीं माना जा रहा, बल्कि युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

‘अंकल’ वाली राजनीति के पीछे क्या संदेश?

आकाश आनंद की रणनीति साफ दिखाई देती है। वह अपनी उम्र और युवा पहचान को राजनीतिक पूंजी की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका संदेश है कि नई पीढ़ी की समस्याओं—रोजगार, परीक्षा, शिक्षा और अवसर—को समझने के लिए नई सोच और नई राजनीति की जरूरत है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी युवा मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। ऐसे में आकाश का ‘GenZ नेता’ के तौर पर खुद को पेश करना उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति में एक नया मुकाबला खड़ा कर सकता है।

GenZ अब सियासत का नया केंद्र

हाल के वर्षों में युवाओं और खासकर GenZ से जुड़े मुद्दे राजनीति के केंद्र में आए हैं। परीक्षा, पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा को लेकर छात्रों के आंदोलनों ने राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है।

BSP भी अब दलित राजनीति के पार युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। मायावती ने भी GenZ को लेकर बयान देकर इस मुद्दे को पार्टी की रणनीति में अहम जगह दी है।

राहुल से योगी तक, युवाओं पर नजर

कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। समाजवादी पार्टी भी युवाओं और रोजगार के सवालों को अपने राजनीतिक अभियान में जगह देती रही है।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भी नई युवा नीति लाने की बात कही है। यानी 2027 से पहले युवा मतदाता सभी प्रमुख दलों की प्राथमिकताओं में दिखाई दे रहे हैं।

कितने महत्वपूर्ण हैं GenZ वोटर?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में युवा वोटरों की संख्या चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है। 18 से 29 वर्ष की आबादी का बड़ा हिस्सा राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मतदाता समूह है। खासकर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को अपने साथ जोड़ना पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।

यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले सोशल मीडिया, रोजगार, शिक्षा और युवा नेतृत्व जैसे मुद्दे और ज्यादा उभर सकते हैं।

क्या GenZ बदलेगा यूपी का चुनावी समीकरण?

आकाश आनंद की ‘अंकल’ वाली टिप्पणी ने भले ही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया हो, लेकिन असली परीक्षा चुनावी मैदान में होगी। GenZ केवल उम्र के आधार पर वोट करेगा या रोजगार, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और भविष्य के अवसरों जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देगा, यह देखना अहम होगा।

एक बात जरूर साफ है—2027 की यूपी की सियासत में युवा सिर्फ भीड़ का हिस्सा नहीं, बल्कि सत्ता की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण वोटर बन सकता है।

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