UNGA में जयशंकर का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, बोले- आतंकवाद के खिलाफ अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख दोहराया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में पाकिस्तान का सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन उनके वक्तव्य का संदर्भ पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने की बात भी कही।
UNGA में आतंकवाद पर भारत का कड़ा संदेश
न्यूयॉर्क में 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की जनरल डिबेट में जयशंकर ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार सीमा पार हमलों के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देती है, तो यह केवल दो देशों के बीच का मुद्दा नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन जाता है।
जयशंकर ने ऐसे मामलों में संबंधित सरकारों को जवाबदेह ठहराने और आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को उजागर करने की जरूरत पर जोर दिया।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना दिया संदेश
जयशंकर ने अपने भाषण में कहा कि एक “serial practitioner of terrorism” ने महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। यह टिप्पणी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक दिन पहले दिए गए UNGA संबोधन के संदर्भ में थी, जिसमें उन्होंने कश्मीर और भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ देश अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा।
‘आतंकवाद और सद्भावना साथ नहीं चल सकते’
विदेश मंत्री ने भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में यह भी कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ-साथ कायम नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में उन समझौतों और व्यवस्थाओं पर स्वाभाविक रूप से दोबारा विचार किया जाएगा, जो दोस्ती और सद्भावना की भावना पर आधारित हैं।
उन्होंने आतंकवाद को अंजाम देने वाले पक्ष से अपना रवैया बदलने की बात भी कही।
भारत ने दोहराई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह की नरमी नहीं होनी चाहिए और इसके वित्तीय पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर कार्रवाई की वकालत करता रहा है। इस भाषण में भी आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक व्यवस्था से जोड़कर देखा गया।
शहबाज शरीफ के भाषण के एक दिन बाद आया बयान
जयशंकर का यह संबोधन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के UNGA भाषण के एक दिन बाद आया। शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर समेत भारत-पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों को उठाया था। इसके बाद भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के बयानों का जवाब दिया गया।
इससे पहले भारत की ओर से UNGA में जवाब के अधिकार के तहत भी पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को लेकर आरोप लगाए गए थे। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति का आरोप लगाया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की सुरक्षा नीति में बदलाव नहीं होगा।
वैश्विक मंच से आतंकवाद पर भारत की प्राथमिकता
जयशंकर ने अपने भाषण में केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों की बात नहीं की, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत का कहना है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक या रणनीतिक उद्देश्य के लिए सामान्य नहीं बनाया जा सकता।
UNGA के मंच से दिए गए इस संदेश में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति, आत्मरक्षा के अधिकार और आतंकवाद को समर्थन देने वाले ढांचे पर जवाबदेही की मांग को प्रमुखता दी। अब जयशंकर के बयान के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर कूटनीतिक बयानबाजी पर भी नजर रहेगी।





