रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन, PM मोदी बोले- संघर्षों से मजबूत बने पूर्व राष्ट्रपति

सामान्य परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की रामनाथ कोविंद की यात्रा अब उनकी अपनी जुबानी सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी आत्मकथा ‘My Life, My Struggles’ का विमोचन करते हुए इसे लोकतंत्र और युवा पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण धरोहर बताया।
किताब में दर्ज है संघर्षों की कहानी
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा में गांव से राष्ट्रपति भवन तक के सफर को जगह दी गई है। किताब में उनके बचपन, संघर्ष, सामाजिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवा पीढ़ी को कोविंद के जीवन को उन्हीं के शब्दों में पढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक, इस सफर से मेहनत, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
बचपन का दर्द जिसने बनाया मजबूत
पीएम मोदी ने कोविंद के बचपन की एक बेहद भावुक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में उनके घर में आग लग गई थी। परिवार की चीजें बचाने की कोशिश के दौरान उनकी मां आग की चपेट में आ गईं और उनका निधन हो गया।
इतनी कम उम्र में मां को खोना किसी बच्चे के लिए बेहद बड़ा आघात होता है। मोदी ने कहा कि ऐसी घटना किसी को भी तोड़ सकती थी, लेकिन कोविंद ने इस दर्द को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मुश्किलों ने उन्हें और मजबूत बनाया।
राष्ट्रपति पद के बाद भी सक्रिय
प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथ कोविंद की कर्तव्यनिष्ठा की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कोविंद ने खुद को सार्वजनिक जिम्मेदारियों से अलग नहीं किया।
वह ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय से जुड़े काम में सक्रिय हैं। मोदी के अनुसार, ऐसे विषय देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।
युवाओं के लिए क्यों खास है यह सफर?
कोविंद का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधन किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करते। मेहनत, शिक्षा और लगातार आगे बढ़ने का साहस परिस्थितियों को बदल सकता है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश को भविष्य में ऐसे अनेक युवाओं की जरूरत है, जो कठिनाइयों से घबराने के बजाय उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करें। यही सोच विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे सकती है।
गांव से राष्ट्रपति भवन तक
रामनाथ कोविंद का जीवन भारतीय लोकतंत्र की उस तस्वीर को सामने लाता है, जिसमें सामान्य पृष्ठभूमि से आया व्यक्ति भी संवैधानिक व्यवस्था के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।
उनकी आत्मकथा सिर्फ व्यक्तिगत घटनाओं का संग्रह नहीं है। इसमें उस सामाजिक और राजनीतिक यात्रा की झलक भी मिलती है, जिसने उन्हें सार्वजनिक जीवन में एक अलग पहचान दी।
एक किताब, कई पीढ़ियों के लिए संदेश
आत्मकथा का विमोचन केवल एक पुस्तक के जारी होने का अवसर नहीं, बल्कि एक लंबे सार्वजनिक जीवन को समझने का मौका भी है। कोविंद के संघर्ष, उपलब्धियां और अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए संदर्भ बन सकते हैं।
उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि परिस्थितियां चाहे कितनी कठिन क्यों न हों, लगातार प्रयास इंसान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। यही संघर्ष की वह ताकत है, जिसे अब उनकी अपनी कलम से पढ़ा जा सकेगा।





