राजनीतिक

AAP-कांग्रेस की सीधी लड़ाई पर केजरीवाल का बड़ा दावा, बोले- हमारा वोट बैंक सिर्फ विपक्षी नहीं

पंजाब और गोवा में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी आमने-सामने हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर दोनों INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में वोट बंटने की राजनीति पर बहस तेज है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि AAP केवल विपक्षी वोटों पर निर्भर नहीं है और बीजेपी से नाराज मतदाता भी उसे चुनते हैं।

कांग्रेस से मुकाबले पर केजरीवाल का जवाब

पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। गोवा में भी दोनों दल अलग-अलग चुनावी राह पर हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि बीजेपी के खिलाफ लड़ रही दो पार्टियां एक-दूसरे के वोट काटेंगी तो फायदा किसे होगा?

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस सवाल को ही गलतफहमी बताया है। उनका कहना है कि यह मानना सही नहीं है कि AAP सिर्फ नॉन-बीजेपी वोट हासिल करती है।

‘हम सिर्फ विपक्षी वोटों पर निर्भर नहीं’

केजरीवाल के मुताबिक, यह धारणा कांग्रेस के लिए भले लागू हो सकती है, लेकिन AAP के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि AAP को बीजेपी से जुड़े ऐसे मतदाताओं का समर्थन भी मिलता है, जो कांग्रेस को वोट देना पसंद नहीं करते।

उनके इस तर्क ने खास तौर पर गोवा की राजनीति में वोट ट्रांसफर और विपक्षी वोटों के बंटवारे की बहस को नया मोड़ दिया है।

दिल्ली के चुनावी आंकड़ों का दिया उदाहरण

अपने दावे को समझाने के लिए केजरीवाल ने दिल्ली का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में AAP को करीब 52 फीसदी वोट मिलता था, जबकि लोकसभा चुनाव में उसका वोट शेयर करीब 32 फीसदी रहा।

केजरीवाल के मुताबिक, इस अंतर का लगभग 20 प्रतिशत वोट लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर चला गया, लेकिन विधानसभा चुनाव में वापस AAP के साथ आया। उनका दावा है कि इस वर्ग के मतदाता कांग्रेस को वोट नहीं देते।

‘BJP से नाराज वोटर कांग्रेस को नहीं चुनता’

केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी से नाराज या असंतुष्ट मतदाता जरूरी नहीं कि कांग्रेस का विकल्प चुने। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के लिए AAP स्वीकार्य राजनीतिक विकल्प हो सकती है।

यही तर्क वह गोवा में भी लागू मानते हैं। उनका कहना है कि बीजेपी की एंटी-इनकम्बेंसी का पूरा फायदा कांग्रेस को मिलने की धारणा सही नहीं है।

गुजरात का भी किया जिक्र

AAP संयोजक ने अपने तर्क के समर्थन में गुजरात का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि वहां बीजेपी के मजबूत राजनीतिक आधार के बावजूद AAP ने अपनी जगह बनाई और बीजेपी के गढ़ में चुनावी सफलता हासिल की।

उनके मुताबिक, बीजेपी का कुछ वोटर AAP को स्वीकार कर सकता है, लेकिन कांग्रेस को वोट देने के लिए तैयार नहीं होता। हालांकि, इन चुनावी दावों और आंकड़ों का वास्तविक असर संबंधित राज्यों के चुनाव परिणाम और मतदाता व्यवहार से ही स्पष्ट होगा।

पंजाब में होगी असली परीक्षा

केजरीवाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और AAP-कांग्रेस का सीधा मुकाबला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन में साथ हैं, लेकिन पंजाब और गोवा में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं।

अब सवाल केवल सीटों का नहीं, बल्कि वोटों के सामाजिक और राजनीतिक ट्रांसफर का भी है। अगर केजरीवाल का दावा सही साबित होता है तो AAP को कांग्रेस से अलग लड़ने का नुकसान कम हो सकता है। लेकिन अगर विपक्षी वोटों का बंटवारा बीजेपी को फायदा पहुंचाता है, तो चुनावी तस्वीर बिल्कुल अलग होगी।

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