मनोज जरांगे पाटिल को बड़ा झटका, आजाद मैदान में भूख हड़ताल की अनुमति नहीं

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल को मुंबई के आजाद मैदान में 19 सितंबर को प्रस्तावित भूख हड़ताल के लिए पुलिस की अनुमति नहीं मिली है। आजाद मैदान पुलिस ने आंदोलन की अनुमति देने से इनकार करते हुए पिछले साल के प्रदर्शन में नियमों और शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया है।
पुलिस की ओर से गंगाधर कलकुटे के नाम से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जरांगे के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है।
अमित साहनी मामले का दिया हवाला
पुलिस ने अनुमति नहीं देने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के अमित साहनी मामले में दिए गए निर्देशों का भी हवाला दिया है। पुलिस के मुताबिक, पिछले साल आजाद मैदान में हुए प्रदर्शन के दौरान निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया गया था।
इसी आधार पर इस बार प्रस्तावित आंदोलन को अनुमति देने से इनकार किया गया है। पुलिस के फैसले से जरांगे के आंदोलन की तैयारियों को झटका जरूर लगा है, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया है।
‘हम शांतिपूर्वक मुंबई जाएंगे’
मनोज जरांगे पाटिल ने पुलिस के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद वह मुंबई जाएंगे और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे।
जरांगे ने सवाल उठाया कि अगर पिछले साल इसी सरकार और गृह विभाग के रहते आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति मिली थी, तो इस साल नियमों और अमित साहनी मामले का हवाला देकर अनुमति क्यों रोकी जा रही है।
उन्होंने सरकार पर मराठा समुदाय के साथ अन्याय करने का आरोप भी लगाया।
सरकार और कानून पर उठाए सवाल
जरांगे ने कहा कि शर्तें लगाकर आंदोलन को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न्याय और संविधान की भावना का सम्मान नहीं कर रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस मामले का हवाला अब दिया जा रहा है, उसे पिछले साल क्यों नहीं उठाया गया। जरांगे के मुताबिक, उनका आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा।
अदालत जाने के संकेत
पुलिस के फैसले को चुनौती देने के संकेत देते हुए जरांगे ने कहा कि उनके वकीलों की टीम पूरे मामले को देखेगी। जरूरत पड़ने पर यह तय किया जाएगा कि कानूनी लड़ाई किस मंच पर लड़ी जाए।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए आवेदन किया गया था और पुलिस को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
‘मुंबई जाएंगे, आंदोलन नहीं रुकेगा’
जरांगे पाटिल ने दोहराया कि पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद वह मुंबई जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे।
अब बड़ा सवाल यह है कि 19 सितंबर को जरांगे के मुंबई पहुंचने के बाद प्रशासन का रुख क्या रहता है और क्या इस विवाद का समाधान बातचीत या कानूनी रास्ते से निकलता है।
आगे क्या होगा?
एक तरफ पुलिस ने पिछले प्रदर्शन की कथित नियम उल्लंघन की घटनाओं को आधार बनाकर अनुमति रोक दी है, वहीं जरांगे अपने आंदोलन पर अड़े हुए हैं। ऐसे में 19 सितंबर की तारीख मराठा आंदोलन और महाराष्ट्र सरकार के बीच टकराव का नया केंद्र बन सकती है।
फिलहाल जरांगे की ओर से कानूनी विकल्पों पर विचार किए जाने और शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम और जरांगे की रणनीति पर टिकी हैं





