मायावती ने BRICS ‘न्यू डेल्ही डिक्लरेशन’ को बताया कूटनीतिक उपलब्धि, चीन सीमा विवाद पर भी बोलीं

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दिल्ली में आयोजित BRICS समिट 2026 में जारी ‘न्यू डेल्ही डिक्लरेशन’ की तारीफ की है।
मायावती ने रविवार को कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच BRICS देशों का सर्वसम्मति से घोषणा-पत्र जारी करना आपसी समझ और कूटनीतिक सूझबूझ का संकेत है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और आर्थिक चुनौतियों का किया जिक्र
मायावती ने कहा कि BRICS देश रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से पैदा हुए तनाव और टैरिफ जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहे हैं।
उनके मुताबिक, ऐसे माहौल में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में ‘न्यू डेल्ही डिक्लरेशन’ पर सर्वसम्मति बनना महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है।
उन्होंने BRICS देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा को भी उम्मीद जगाने वाला कदम बताया।
‘BRICS करेंसी’ को लेकर भी मायावती की टिप्पणी
BSP सुप्रीमो ने कहा कि BRICS देशों के बीच आर्थिक और आपसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने ‘BRICS करेंसी’ के विकास की संभावना का भी उल्लेख किया और इसे भविष्य में अहम कदम बताया। हालांकि, इसका स्वरूप और व्यावहारिक दिशा किस तरह तय होती है, यह आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलीस्तीन और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख की तारीफ
मायावती ने BRICS घोषणा-पत्र में फिलीस्तीन के मुद्दे पर Two-State Solution और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलीस्तीन राष्ट्र के समर्थन का भी जिक्र किया।
इसके साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया।
मायावती के अनुसार, इन मुद्दों पर सामने आया रुख भारत के दृष्टिकोण के लिए उचित समर्थन दर्शाता है और यह प्रशंसा के योग्य है।
चीन के साथ सीमा विवाद पर क्या बोलीं मायावती?
भारत और चीन के संबंधों को लेकर मायावती ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के विकास में साझेदार के रूप में देखने के दृष्टिकोण के सकारात्मक परिणाम क्या होंगे, यह आने वाला समय बताएगा।
मायावती ने स्पष्ट तौर पर कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद का जल्द से जल्द आपसी सहमति से समाधान होना दोनों देशों के हित में बेहतर होगा।
भारत-चीन के बीच सात मुद्दों पर बनी सहमति का जिक्र
BRICS समिट 2026 के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की बात सामने आई है।
इनमें द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना, मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकना और सीमा विवाद के निष्पक्ष व दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान की दिशा में प्रयास करना शामिल है।
मायावती ने इसी व्यापक संदर्भ में भारत और चीन के बीच बेहतर संबंधों की उम्मीद जताई है।
BRICS के भविष्य पर मायावती की नजर
मायावती के बयान से साफ है कि वह BRICS घोषणा-पत्र को केवल औपचारिक दस्तावेज के रूप में नहीं देख रही हैं, बल्कि इसे वैश्विक तनाव के बीच बहुपक्षीय सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग, प्रस्तावित नई पहलों और भारत-चीन संबंधों को लेकर बनी सहमति आने वाले समय में किस तरह आगे बढ़ती है।





