
सीएसपी राजीव पाठक का दावा- कुंज बिहारी तिवारी के साथ पुलिस अभिरक्षा में नहीं हुई मारपीट, किसी भी अधिकारी की निगरानी में पांच सदस्यीय टीम बनाकर फुटेज देखने की दी चुनौती
रीवा। कल्पना मिश्रा की मौत के मामले को लेकर रीवा में चल रहे आमरण अनशन के बीच अब राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मऊगंज से जुड़े कुंज बिहारी तिवारी द्वारा बिछिया थाना में पुलिस अभिरक्षा के दौरान टीआई विजय सिंह पर मारपीट का आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है। पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि थाने में किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई और पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध है।
सीएसपी राजीव पाठक और उप निरीक्षक दीपक तिवारी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कुंज बिहारी तिवारी के साथ पुलिस अभिरक्षा में मारपीट नहीं की गई। सीएसपी ने यहां तक कहा कि यदि आरोपों को लेकर किसी को संदेह है तो प्रदेश के किसी भी विश्वसनीय अधिकारी की निगरानी में पांच सदस्यीय टीम गठित कर बिछिया थाना की संबंधित अवधि की पूरी सीसीटीवी फुटेज देखी जा सकती है।
पुलिस के मुताबिक जिस दिन की घटना को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उस दिन बिछिया थाना में करीब 20 से 25 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। पुलिस का दावा है कि थाने लाए गए सभी लोगों को सम्मानपूर्वक बैठाया गया और टीआई विजय सिंह ने कुंज बिहारी तिवारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति के साथ मारपीट नहीं की।
सिटी हॉस्पिटल पहुंचने के बाद शुरू हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार 9 सितंबर को करीब एक दर्जन लोगों के साथ सिटी हॉस्पिटल पहुंचने और अस्पताल से रिकॉर्ड की मांग करने के दौरान स्थिति ऐसी बनी कि वहां उपचार करा रहे मरीजों और उनके परिजनों में भय का माहौल पैदा हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी संबंधित लोगों को बिछिया थाना ले जाकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और राजस्व न्यायालय में पेश किया। बाद में उन्हें मुचलके पर रिहा किया गया।
इसके बाद आमरण अनशन के मंच से टीआई विजय सिंह पर मारपीट करने का आरोप लगाए जाने से विवाद और बढ़ गया। कुंज बिहारी तिवारी की ओर से सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर पोस्ट कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों की जांच की जानी चाहिए।
पुलिस ने कहा- विरोध का अधिकार है, लेकिन तथ्य भी जरूरी
सीएसपी राजीव पाठक ने कहा कि पुलिसिंग को लेकर सवाल पूछे जाने पर जवाब दिया जा सकता है लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाकर माहौल बनाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को एकतरफा रूप से निर्दयी बताने अथवा किसी व्यक्ति के माध्यम से किसी वर्ग को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करना सामाजिक रूप से उचित नहीं है।





