भोपालमध्य प्रदेश

भोपाल में इतने रसूखदार किरदार कैसे होगी कार्यवाही ,बड़े तालाब एफटीएल में दिग्गज नेताओं और अधिकारियों ने ताने आलीशान बंगले!

भोपाल राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब के एफटीएल की सीमा निर्धारित करने के लिए एनजीटी के आदेश पर मंगलवार को चौथे दिन भी सर्वे जारी रहा। सर्वे दल ने गोरा गांव, बिसनखेड़ी सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्पॉट और ड्रोन के माध्यम से जांच की। टीटी नगर तहसील क्षेत्र में करीब 100 निर्माणों और शहर तहसील क्षेत्र में एक-दो निर्माणों का सर्वे किया गया। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री, वर्तमान मंत्री, पुलिस के पूर्व और वर्तमान अधिकारियों सहित कई रसूखदारों के आलीशान बंगले सामने आए।

सर्वे के दौरान सूरज नगर स्थित सेंट्रल पार्क, माधव बाग और भारत भवन में बन रहे ओपन थियेटर व पार्क सहित कई क्षेत्र तालाब के किनारे मुनारों के पास पाए गए। कई स्थानों पर मुनारें पानी में डूबी हुई मिलीं, जबकि कुछ जगह मुनारें गायब थीं। बिसनखेड़ी में तालाब के बीच में ही रिसोर्ट और बंगले बने दिखाई दिए। जहां सर्वे दल नहीं पहुंच सका, वहां ड्रोन से फोटोग्राफी और वीडियो बनाए गए। सर्वे दोपहर 12 बजे शुरू हुआ और शाम 5:30 बजे तक चला।

एनजीटी के आदेश पर सात प्रशासनिक अधिकारियों और चार पर्यावरणविदों को मिलाकर विशेष दल बनाया गया है। हालांकि मौके पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की साइंटिस्ट सत्या सिंह, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीतेश चौरसिया और उनके सहयोगी तथा पर्यावरणविद डॉ. एससी पांडे और याचिकाकर्ता नूर राशिद खान ही सर्वे करते दिखाई दिए। अन्य सदस्यों में एनजीटी से कोई सदस्य अभी तक शामिल नहीं हुआ। मेनिट के प्रोफेसर और नगर निगम के झील संरक्षण अधिकारी भी कुछ समय के लिए ही मौके पर पहुंचे। पटवारी और आरआई के नहीं पहुंचने पर कलेक्टर को सूचना दी गई, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे।

सेंट्रल पार्क में मंत्री और पूर्व मंत्री की कोठियां

सर्वे दल ने शुरुआत सेंट्रल पार्क से की। यहां बड़े तालाब की मुनारों और एफटीएल की जांच की गई। दल को कई मुनारें पानी में डूबी मिलीं। ड्रोन से किए गए सर्वे में पाया गया कि एफटीएल सेंट्रल पार्क के किनारे से मुख्य सड़क तक पहुंच रहा है। दल ने आशंका जताई कि कॉलोनी में बंगले बनाने के लिए तालाब के क्षेत्र में भराव किया गया है।

कॉलोनी में उपमुख्यमंत्री, पूर्व आईएएस, पुलिस अधिकारी और कांग्रेस के बड़े नेता के रिश्तेदार सहित कई रसूखदारों के बंगले बताए गए। एक बंगले का क्षेत्रफल करीब 20 हजार वर्गफीट बताया गया। ये बंगले किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से बताए गए हैं। सेंट्रल पार्क के पास पूर्व निलंबित थाना प्रभारी सक्सेना और दिल्ली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जुड़े निर्माणों की जानकारी भी सामने आई। माधव बाग में भी इसी तरह कॉलोनी बनाई जा रही है।

पूर्व गृहमंत्री का बंगला भी मुनार के किनारे

इसी क्षेत्र में एक अन्य कॉलोनी में कई बंगले बन चुके हैं और कुछ का निर्माण जारी है। यहां पूर्व गृहमंत्री का बंगला भी बताया गया जो किसी जैन के नाम से दर्ज बताया गया है। बंगले की दीवार के पास मुनार मिली जो पानी में डूबी हुई थी। यहां भी भराव कर बंगले बनाए जाने की बात सामने आई। सड़क बनाने के लिए भी भराव का काम जारी मिला।

बिसनखेड़ी में पूर्व डीजीपी समेत कई बंगले

बिसनखेड़ी में सर्वे दल ने कई स्थानों पर एफटीएल की जांच की। यहां मुनारें पानी में डूबी मिलीं। इसके पास अमरीक सिंह के नाम से करीब दो एकड़ क्षेत्र में आलीशान रिसोर्ट जैसा निर्माण पाया गया। वहीं पूर्व डीजीपी मेथिलीशरण गुप्त का बंगला भी मिला,जिसके चारों तरफ पानी दिखाई दिया। एसीएस राजेश राजौरा का भी एफटीएल के अंदर बंगला होने की बात सामने आई। इसी तरह तालाब के कैचमेंट में 50 से अधिक बड़े अधिकारियों के बंगले और फार्म हाउस बने होने की जानकारी मिली है। सर्वे दल अब इन निर्माणों की स्थिति और एफटीएल सीमा का मिलान करेगा।

तालाब के अंदर मिले सीवेज के चेंबर

सर्वे के दौरान बिसनखेड़ी में तालाब के अंदर सीवेज के चेंबर भी दिखाई दिए। इनकी लाइन पूरी तरह पानी में डूबी हुई थी। मुनारें भी पानी में डूबी मिलीं। सर्वे दल ने इस पर नाराजगी जाहिर की, क्योंकि सीवेज का पानी तालाब में जाने की बात सामने आई। यही तालाब शहर के लिए पानी का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में तालाब में सीवेज पहुंचना पर्यावरण और जल गुणवत्ता के लिहाज से गंभीर विषय है।

भारत भवन में भी एफटीएल के अंदर निर्माण

भारत भवन के पीछे के हिस्से में एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में पार्क और ओपन थियेटर का निर्माण तेजी से चल रहा था। सर्वे दल ने इस निर्माण को भी तालाब के किनारे एफटीएल की सीमा में पाया। यह काम पर्यटन विभाग द्वारा कराया जा रहा है।

सर्वे दल ने निर्माण की अनुमति से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन भारत भवन प्रबंधन उन्हें उपलब्ध नहीं करा सका। अब सर्वे दल निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और एफटीएल की वास्तविक सीमा की जांच करेगा। ड्रोन से बनाए गए फोटो और वीडियो भी सर्वे रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे।

मुकेश पाण्डेय

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