पुतिन भारत आएंगे तो साथ लाएंगे नई ताकत, PD-8 इंजन और Su-57 पर बड़े समझौते की उम्मीद

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आने वाले हैं। उनके दिल्ली दौरे को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान रक्षा, विमानन और औद्योगिक सहयोग से जुड़े कई समझौतों पर चर्चा की संभावना है।
साथ आएगी नई विमानन तकनीक
पुतिन के दौरे से पहले रूसी सरकारी कंपनी रोस्टेक नई दिल्ली में PD-8 इंजन प्रदर्शित करने की तैयारी में है। यह इंजन SJ-100 क्षेत्रीय यात्री विमान के लिए विकसित किया गया है। इसका वजन करीब 1.7 टन है, जबकि नैसेल के साथ यह लगभग 2.3 टन बैठता है और करीब 8 टन टेकऑफ थ्रस्ट पैदा करता है।
SJ-100 पर भारत की बड़ी भूमिका
SJ-100 में 75 से 103 यात्रियों के बैठने की क्षमता है और इसकी उड़ान सीमा लगभग 3,530 किलोमीटर बताई गई है। भारत में इसके उत्पादन की योजना भी महत्वपूर्ण है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने रूसी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के साथ विमान निर्माण को लेकर करार किया था।
तीन साल में शुरू हो सकता है उत्पादन
रूसी पक्ष के अनुसार भारत में SJ-100 के उत्पादन की शुरुआत अगले तीन वर्षों में हो सकती है। रूस ने यह भी संकेत दिया है कि भारतीय बाजार में क्षेत्रीय और कम दूरी के विमानों की अच्छी संभावनाएं हैं। अगर योजना आगे बढ़ती है, तो इससे भारतीय एविएशन सेक्टर में निर्माण क्षमता और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
Su-57 पर भी बड़ी बातचीत
पुतिन के भारत दौरे का सबसे संवेदनशील हिस्सा रक्षा सहयोग हो सकता है। क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की पेशकश में रुचि रखता है। दोनों देशों के बीच Su-57 की तकनीक साझा करने की संभावनाओं पर भी बातचीत चलने की बात सामने आई है।
रक्षा से नागरिक विमानन तक साझेदारी
भारत और रूस के रिश्ते लंबे समय से रक्षा सहयोग पर टिके रहे हैं, लेकिन अब नागरिक विमानन और औद्योगिक उत्पादन भी इस साझेदारी का हिस्सा बन रहे हैं। SJ-100 का संभावित भारतीय उत्पादन और Su-57 पर तकनीकी सहयोग की चर्चा इस बदलाव को दिखाती है।
असली तस्वीर समझौतों के बाद सामने आएगी
पुतिन का भारत दौरा इसलिए खास है क्योंकि इसके केंद्र में सिर्फ राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि तकनीक और उत्पादन की संभावनाएं भी हैं। PD-8 इंजन से लेकर SJ-100 और Su-57 तक, आने वाले फैसले यह तय कर सकते हैं कि भारत-रूस साझेदारी आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ेगी। अब नजर सिर्फ घोषणाओं पर नहीं, बल्कि उनके जमीन पर उतरने पर होगी।





