सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों के बाद सरकार और विपक्ष आमने-सामने, जांच से खुलेगा बड़ा राज

संदिग्ध शराब से मौतों ने मध्य प्रदेश के सागर जिले के गांवों में मातम और डर का माहौल पैदा कर दिया है। अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ते लोगों के बीच सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा दे रही है, जबकि कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक नाकामी बताते हुए जवाबदेही और इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
सागर में मौतों से मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में संदिग्ध अवैध शराब के सेवन के बाद मौतों का सिलसिला चिंता बढ़ा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 100 प्रभावित लोग सागर और बंडा के अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर मौतों की संख्या इससे अधिक होने की अपुष्ट जानकारी भी सामने आई है।
गांवों में पहुंचे उपमुख्यमंत्री
उपमुख्यमंत्री और सागर के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने बमूरा भेड़ा, नौराज, गूगरा खुर्द, धुरमार, चौका, हनौती और पापेट समेत कई गांवों में मृतकों के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों के बीच पहुंचकर उन्होंने सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
शराब माफिया पर कार्रवाई का दावा
राजेंद्र शुक्ल ने अवैध शराब के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की बात कही। उनके मुताबिक पुलिस और प्रशासन ने 10 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस दो मामलों में करीब 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर चुकी है। अधिकारियों को निर्माण से लेकर भंडारण, परिवहन और वितरण तक पूरे नेटवर्क की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
मजिस्ट्रियल जांच से खुलेगा राज
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जैसीनगर के SDM को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच में मौतों का वास्तविक कारण, शराब का स्रोत और निर्माण-वितरण में शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की कोशिश होगी। संबंधित विभागों की संभावित लापरवाही की भी पड़ताल की जाएगी।
पटवारी ने सरकार पर बोला हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रभावित गांवों और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों और अस्पताल में भर्ती लोगों से बातचीत की। पटवारी ने सरकार पर तीखा आरोप लगाते हुए आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग की और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की बात कही।
असली सवाल जिम्मेदारी का
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि संदिग्ध शराब पीड़ितों तक कैसे पहुंची और निगरानी तंत्र कहां विफल हुआ। जांच रिपोर्ट मौतों की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की पहचान में अहम होगी। पीड़ित परिवारों के लिए न्याय तभी पूरा माना जाएगा, जब कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित न रहकर उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचे, जिसने इतने घरों को उजाड़ दिया।





