भोपालमध्य प्रदेशरीवा

65 वर्षीय वृद्ध का आरोप न्यायालय के आदेश के पालन के लिए तहसील के लगा रहे चक्कर, लेकिन नामांतरण पर टालमटोल, तहसीलदार ने कहा जब समय मिलेगा, तब कार्रवाई करूंगा

रीवा। रीवा जिले की गुढ़ तहसील में राजस्व मामलों के निपटारे को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 65 वर्षीय वृद्ध का आरोप है कि जिस जमीन के अधिकार को लेकर उसने करीब 15 वर्षों तक न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः न्यायालय से उसके पक्ष में आदेश हुआ उसी आदेश के पालन के लिए अब उसे तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

वृद्ध के मुताबिक न्यायालय के आदेश के बाद उसने तहसीलदार गुढ़ के समक्ष नामांतरण के लिए आवेदन दिया। उसका कहना है कि उसका मकान उक्त भूमि पर बना हुआ है और यदि समय रहते नामांतरण नहीं हुआ तो संबंधित पक्ष जमीन को बेचने का प्रयास कर सकता है। इसी आशंका को लेकर वृद्ध लगातार राजस्व कार्यालय में कार्रवाई की मांग कर रहा है।

सीएम हेल्पलाइन में भी कार्रवाई नहीं करूंगा वृद्ध का गंभीर आरोप

वृद्ध का आरोप है कि जब उसने अपनी समस्या के शीघ्र निराकरण की मांग की तो तहसीलदार द्वारा कथित तौर पर कहा गया कि मैं सीएम हेल्पलाइन में कार्रवाई नहीं करूंगा न ही किसी के कहने पर कार्रवाई करूंगा। जब मुझे समय मिलेगा तब कार्रवाई करूंगा। वृद्ध के अनुसार उसे यह भी कहा गया कि जरूरत पड़े तो वह कलेक्टर से शिकायत कर सकता है।

यदि वृद्ध के आरोप सही हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर न्यायालय से वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद मिले आदेश के क्रियान्वयन के लिए एक बुजुर्ग को राजस्व कार्यालय में कितने चक्कर लगाने पड़ेंगे?

15 साल मुकदमा लड़ा, अब राजस्व कार्यालय में इंतजार

वृद्ध का कहना है कि जमीन के मामले में उसने लगभग 15 वर्षों तक न्यायालय में मुकदमा लड़ा। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद न्यायालय ने उसके पक्ष में आदेश पारित किया। इसके बाद वह आदेश के पालन और भूमि के नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय पहुंचा।

उसका दावा है कि नामांतरण का विरोध करने वाले पक्ष की ओर से न्यायालय में आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था, लेकिन न्यायालय ने उसे खारिज कर दिया। इसके बावजूद तहसील स्तर पर नामांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।

वृद्ध का यह भी कहना है कि न्यायालय ने नामांतरण पर कोई स्थगन आदेश जारी नहीं किया है। ऐसे में उसका सवाल है कि जब न्यायालय की ओर से कोई रोक नहीं है और विरोध संबंधी आवेदन भी खारिज हो चुका है तो फिर नामांतरण की कार्रवाई क्यों लंबित रखी जा रही है?

पैसे के बिना काम नहीं होता लगे गंभीर आरोप

मामले में वृद्ध ने तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बिना पैसे दिए काम नहीं होता और इसी वजह से उसके नामांतरण को भी कथित तौर पर रोका जा रहा है। हालांकि रिश्वत लेने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।

लेकिन यदि एक 65 वर्षीय व्यक्ति वास्तव में न्यायालय के आदेश के पालन के लिए महीनों से राजस्व कार्यालय के चक्कर काट रहा है तो यह मामला केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं बल्कि राजस्व व्यवस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता का भी सवाल बन जाता है।

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