राष्ट्रीय

निठारी कांड से बरी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत, चाय की दुकान में मिला शव

देश के चर्चित निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका शव सप्त सरोवर क्षेत्र में एक चाय की दुकान के भीतर मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

चाय की दुकान के अंदर मिला शव

हरिद्वार के सप्त सरोवर इलाके में लालमाता मंदिर के सामने स्थित एक चाय की दुकान में शुक्रवार को एक व्यक्ति मृत मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मृतक की पहचान अल्मोड़ा के भिकियासैंण क्षेत्र के निवासी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चला रहा था। पुलिस ने उसके परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है।

मौत के कारणों की जांच में जुटी पुलिस

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मीडिया रिपोर्टों में इसे आत्महत्या बताया गया है, लेकिन पुलिस की जांच पूरी होने से पहले मौत की परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

2006 में सामने आया था निठारी कांड

सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी इलाके से सामने आए मामलों के बाद देशभर में चर्चा में आया था। वह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित D-5 मकान में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। उसी इलाके में बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामलों की जांच के दौरान नाले और आसपास के क्षेत्र से मानव अवशेष बरामद हुए थे।

इसके बाद कोली पर कई आपराधिक मामले चले और अलग-अलग मामलों में उसे दोषी भी ठहराया गया था। हालांकि बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इन दोषसिद्धियों को चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में अंतिम मामले में भी किया था बरी

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में 12 मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा था। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन द्वारा इस्तेमाल किए गए साक्ष्यों में गंभीर कानूनी कमियां थीं और दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।

11 नवंबर 2025 के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि गंभीर संदेह अपने आप में आपराधिक दोषसिद्धि का आधार नहीं हो सकता और दोष सिद्ध करने के लिए कानूनी मानकों के अनुरूप प्रमाण जरूरी हैं।

अब हरिद्वार में मौत ने फिर खड़े किए सवाल

निठारी मामलों में न्यायिक रूप से बरी होने के करीब दस महीने बाद सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत की खबर सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।

फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था। घटना ने एक बार फिर निठारी कांड और उससे जुड़ी लंबी कानूनी प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है।

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