सागर में मकान से मिले 3 करोड़ रुपये, बैगों में छिपी नकदी ने बढ़ाए जांच एजेंसियों के सवाल

मध्य प्रदेश के सागर जिले में पुलिस की एक कार्रवाई ने सभी को हैरान कर दिया। हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को एक मकान से करोड़ों रुपये की नकदी मिली। चार ट्रॉली बैग में रखे करीब 3 करोड़ 2 लाख रुपये ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसका असली मालिक कौन है।
हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को मिली नकदी
यह मामला सागर के गोपालगंज थाना क्षेत्र के तिली तिराहा इलाके का है। पुलिस एक मकान में हथियार की तलाश के लिए पहुंची थी, लेकिन तलाशी के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई।
पुलिस के अनुसार, चार ट्रॉली बैग में रखे कुल 3 करोड़ 2 लाख 14 हजार 500 रुपये मिले। रकम में 500 रुपये के 60,429 नोट शामिल थे।
नोटों की गिनती में लगे कई घंटे
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद पुलिस ने मशीनों की मदद से नोटों की गिनती कराई। पूरी प्रक्रिया में करीब 5 से 6 घंटे का समय लगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर पुलिस ने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी और अब रकम के स्रोत की जांच शुरू कर दी गई है।
मकान मालिक ने रिश्तेदार पर लगाया दावा
पुलिस पूछताछ में मकान मालिक सौरभ अहिरवार ने बताया कि करीब 8 से 10 महीने पहले उसके रिश्तेदार रमेश अहिरवार, जो रिटायर्ड PWD इंजीनियर हैं, कुछ सामान लेकर आए थे।
सौरभ के अनुसार, रमेश एक अलमारी और चार ट्रॉली बैग लेकर आए थे, जिन्हें बंद करके रखा गया था। उसका दावा है कि बैगों में जरूरी दस्तावेज होने की बात कही गई थी।
रिटायर्ड इंजीनियर ने दावे को बताया गलत
वहीं, रमेश अहिरवार ने सौरभ के आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने न तो कोई अलमारी दी थी और न ही बरामद करोड़ों रुपये उनके हैं।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष रखने और जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
वायरल हथियार फोटो की भी जांच
मामले में सोशल मीडिया पर वायरल हथियार वाली तस्वीर को लेकर भी पुलिस ने पूछताछ की है। सौरभ ने दावा किया कि फोटो में दिख रही वस्तु असली पिस्टल नहीं बल्कि उसके दोस्त धर्मेंद्र की लाइटर पिस्टल थी।
अब पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल
करोड़ों रुपये की बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पैसा किसका है और कहां से आया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि क्या यह रकम किसी वैध स्रोत से जुड़ी है या इसके पीछे कोई अवैध गतिविधि है। इसके लिए EOW, लोकायुक्त और आयकर विभाग की भूमिका भी अहम हो सकती है।
सागर का यह मामला अब सिर्फ नकदी बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के स्रोत और स्वामित्व की जांच तक पहुंच गया है। चार बैगों में मिले इस कैश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।





