सरकारी नौकरी के लिए फर्जी 10वीं अंकसूची का इस्तेमाल, CBI ने आठ आरोपियों पर कसा शिकंजा

जबलपुर में ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। CBI ने ऐसे आठ उम्मीदवारों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 10वीं की फर्जी या अमान्य अंकसूची के जरिए भर्ती प्रक्रिया में अपनी मेरिट बढ़ाई और सरकारी डाक विभाग में नियुक्ति हासिल की। जांच के दौरान कई राज्यों से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं।
फर्जी मार्कशीट से हासिल की GDS नौकरी
CBI की जांच के मुताबिक, मामला जनवरी 2023 और जुलाई 2024 के GDS भर्ती चक्र से जुड़ा है। आरोप है कि आठ उम्मीदवारों ने India Post के ऑनलाइन भर्ती पोर्टल पर 10वीं कक्षा की ऐसी अंकसूचियां अपलोड कीं, जिनकी बाद में संबंधित शैक्षणिक बोर्डों से पुष्टि नहीं हो सकी।
GDS भर्ती में चयन 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर तैयार मेरिट सूची से किया जाता है। India Post के नियमों के मुताबिक चयन के बाद उम्मीदवारों के मूल दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
डाक विभाग की ओर से दस्तावेजों का संबंधित बोर्डों से दोबारा सत्यापन कराया गया। जांच में आठ उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण-पत्रों में कथित तौर पर गड़बड़ी सामने आई।
CBI के अनुसार, कुछ अंकसूचियां संबंधित बोर्ड द्वारा जारी ही नहीं की गई थीं, जबकि कुछ दस्तावेजों को फर्जी बताया गया। इसके बाद विभाग ने इन उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
जिन उम्मीदवारों के नाम FIR में शामिल किए गए हैं, उनमें मानवेंद्र सिंह सिकरवार, बद्री प्रसाद यादव, देवेंद्र सिंह चौहान, राजाबाबू अहिरवार, रमाकांत शर्मा, प्रदीप खरे, सौरभ शर्मा और नयन कुमार शामिल हैं।
अलग-अलग राज्यों के बोर्ड के नाम इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि कथित फर्जी अंकसूचियों में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू-कश्मीर स्टेट ओपन स्कूल और झारखंड एकेडमिक काउंसिल जैसे संस्थानों के नाम इस्तेमाल किए गए।
CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दस्तावेजों को तैयार करने और भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने के पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या नहीं।
इससे पहले भी GDS भर्ती में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। 2023 की ओडिशा GDS भर्ती में भी CBI ने फर्जी प्रमाण-पत्रों के कथित इस्तेमाल और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच की थी।
30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियां जांच के दायरे में
CBI की शुरुआती जांच में आठ मामलों के अलावा 30 से अधिक संदिग्ध नियुक्तियों की जानकारी मिलने की बात सामने आई है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराने, उपलब्ध कराने या सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
जांच का दायरा सिर्फ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है। संभावित रूप से शामिल अन्य लोगों और भर्ती या दस्तावेज सत्यापन से जुड़े तंत्र की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आठ ठिकानों पर छापेमारी
CBI ने जांच के दौरान मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में आरोपियों से जुड़े आठ ठिकानों पर तलाशी ली। एजेंसी ने तलाशी के दौरान कथित फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं।
जांच एजेंसी अब जब्त सामग्री की पड़ताल कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि फर्जी अंकसूचियां कहां तैयार हुईं, किसने उपलब्ध कराईं और भर्ती प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
CBI ने मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार FIR में IPC की धारा 120-B, 420, 467, 468 और 471 के साथ BNS की संबंधित धाराएं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
फिलहाल जांच जारी है। आठ उम्मीदवारों के खिलाफ FIR और विभागीय कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कथित फर्जी नियुक्तियों के व्यापक नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।





