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सिंगरौली में 15 करोड़ की दिनदहाड़े डकैती: अभेद सुरक्षा का दावा ध्वस्त योजना बनाते ही पकड़ लेने वाली पुलिस, घटना के बाद भी क्यों खाली हाथ?

सिंगरौली। विंध्य क्षेत्र के सिंगरौली जिले में हुई 15 करोड़ रुपये की सनसनीखेज दिनदहाड़े डकैती ने पूरे मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे 5 हथियारबंद बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में धावा बोलकर करीब 9-10 किलो सोना और 20 लाख रुपये नकद लूट लिए। लूटे गए सोने की कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

इस पूरी वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह नहीं कि डकैती हुई बल्कि यह है कि जिस पुलिस को लेकर दावा किया जाता रहा है कि वह अपराधियों को योजना बनाते समय ही पकड़ लेती है वही पुलिस इस बड़ी घटना के बाद भी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है।

घटना के अनुसार दो बदमाश पहले ग्राहक बनकर बैंक में दाखिल हुए। कुछ ही सेकंड में उन्होंने पिस्टल निकालकर कर्मचारियों और ग्राहकों को बंधक बना लिया। इसके बाद तीन अन्य साथी अंदर घुसे और पूरे बैंक को अपने कब्जे में ले लिया। बदमाश सीधे उस लॉकर तक पहुंचे जहां गिरवी रखा गया सोना रखा था इससे साफ है कि उन्होंने पहले से रेकी और पूरी प्लानिंग की थी।

महज 10 से 15 मिनट के भीतर बदमाशों ने पूरा माल समेट लिया और बैग में भरकर फरार हो गए। वारदात के दौरान हथियार लहराते हुए बदमाशों ने बैंक में दहशत का माहौल बना दिया और किसी को विरोध करने का मौका नहीं दिया।

रीवा रेंज की पुलिस अक्सर यह दावा करती रही है कि अपराधियों को वारदात से पहले ही दबोच लिया जाता है चाहे वे तलवार लहरा रहे हों या हथियारों के साथ योजना बना रहे हों। कई मामलों में ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं जहां पुलिस ने अपराधियों को घटना से पहले ही पकड़ लिया।

लेकिन सिंगरौली की यह डकैती उन दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही है। अगर पुलिस का खुफिया तंत्र इतना मजबूत है तो आखिर इस बड़ी वारदात की भनक क्यों नहीं लगी? और सबसे बड़ा सवाल घटना के बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर कैसे हैं?

स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं सूचना तंत्र कमजोर तो नहीं पड़ गया है। क्या पुलिस का नेटवर्क जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहा? या फिर अपराधियों को कहीं से ऐसी जानकारी मिल रही है जिससे वे आसानी से पुलिस की पकड़ से बच निकलते हैं?

लोगों में गुस्सा और डर दोनों साफ दिखाई दे रहे हैं। एक ओर इतनी बड़ी डकैती ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं वहीं दूसरी ओर आरोपियों का अब तक गिरफ्त से बाहर होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर रहा है।

घटना के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर डीजीपी कैलाश मकवाना सिंगरौली पहुंचे। रीवा रेंज के आईजी मौके पर डटे हैं। फोरेंसिक टीम जांच में जुटी है और जिलेभर में नाकाबंदी कर दी गई है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पुलिस दावा कर रही है कि जल्द ही इस मामले का खुलासा किया जाएगा लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवाल अभी भी कायम हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है क्या अपराध से पहले कार्रवाई का दावा अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है? अगर पुलिस योजना बनाते अपराधियों को पकड़ सकती है तो इतनी बड़ी डकैती के बाद भी वे गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?

सिंगरौली की यह घटना केवल एक डकैती नहीं बल्कि पुलिस के खुफिया तंत्र और जमीनी निगरानी पर बड़ा सवाल है। अगर समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया तो यह घटना आने वाले समय में सिस्टम की विफलता का स्थायी उदाहरण बन सकती है।

फिलहाल पूरे विंध्य क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पुलिस अपनी साख बचा पाएगी या यह डकैती अभेद सुरक्षा के दावों की आखिरी सच्चाई बनकर सामने आएगी।

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