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गैस एजेंसी से उठा युवक, थाने के कमरे में बरसी लाठियां! जवा पुलिस पर गंभीर आरोप: मदद मांगना पड़ा भारी, ड्राइवरों ने भी थाना प्रभारी बनकर पीटा

रीवा जिले के जवा थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम पथरौड़ा निवासी विपिन सिंह पिता शिवेंद्र सिंह ने जवा पुलिस और थाने के ड्राइवरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि गैस एजेंसी में व्यवस्था बनाए रखने की बात कहना उसे भारी पड़ गया। युवक का आरोप है कि पुलिस ने उसकी बात सुनने के बजाय उसे जबरन गाड़ी में बैठाया थाने ले जाकर बंद कमरे में बेरहमी से पीटा और गंदी-गंदी गालियां दीं।

पीड़ित विपिन सिंह के अनुसार वह अपनी मां के साथ जवा स्थित गैस एजेंसी गैस लेने पहुंचा था। उसकी मां महिलाओं की लाइन में लगी थीं और अंदर कॉपी जमा हो चुकी थी। विपिन केवल OTP बताने के लिए अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसने देखा कि महिलाओं की कतार में कुछ युवक भी खड़े हैं जिससे महिलाओं को परेशानी हो रही थी। विपिन ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से उन युवकों को पीछे हटाने की बात कही लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उसी पर गुस्सा उतार दिया।

विपिन का कहना है कि पुलिसकर्मी उसे गालियां देने लगे और देखते ही देखते उसे जबरन पुलिस वाहन में बैठा लिया गया। युवक के मुताबिक उसे बिना कोई कारण बताए सीधे जवा थाने ले जाया गया जहां उसके साथ इंसानों जैसा नहीं बल्कि अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाने के एक कमरे में उसे बुरी तरह पीटा गया। उसने बताया कि पुलिस के ड्राइवर बृजेश सहित दो अन्य ड्राइवरों और एक पुलिसकर्मी ने मिलकर उसके साथ मारपीट की। युवक का कहना है कि चारों लोग लगातार लात-घूंसों और डंडों से हमला करते रहे। इतना ही नहीं मारपीट के दौरान लगातार अपमानजनक और अशोभनीय गालियां भी दी जाती रहीं।

विपिन सिंह के अनुसार मारपीट इतनी ज्यादा हुई कि उसकी हालत बिगड़ गई। उसका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। हालत गंभीर होने पर उसे जवा अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के बाद होश आया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पुलिस थाने के ड्राइवर किस अधिकार से किसी युवक की पिटाई कर रहे थे? स्थानीय लोगों का कहना है कि जवा थाने में कई बार ड्राइवरों का दबदबा देखने को मिलता है और वे खुद को पुलिस अधिकारी से कम नहीं समझते। लोगों का आरोप है कि आम नागरिकों से अभद्र व्यवहार करना यहां आम बात बनती जा रही है।

घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग पूछ रहे हैं कि यदि कोई युवक केवल महिलाओं की लाइन में लगे लोगों को हटाने की बात कहता है तो क्या उसे थाने में बंद कर पीटना कानून व्यवस्था का हिस्सा है? यदि युवक के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल मारपीट का नहीं बल्कि पुलिसिया दबंगई और मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी माना जाएगा।

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