लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: 15 लोगों की मौत के आरोपी सुरेंद्र शुक्ला की अग्रिम जमानत खारिज

लखनऊ के चर्चित अलीगंज अग्निकांड मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। जिला जज मलखान सिंह ने मामले के आरोपी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बनता। यह मामला जून 2026 में हुई उस भीषण आग से जुड़ा है, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
कोर्ट ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को माना गंभीर
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पर ऐसे भवन के संचालन में भूमिका निभाने का आरोप है, जिसे आवश्यक कानूनी मंजूरियों और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना संचालित किया जा रहा था। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और रिकॉर्ड में आरोपी की भूमिका का उल्लेख किया गया है। अदालत ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।
22 जून 2026 को हुआ था दर्दनाक अग्निकांड
यह हादसा 22 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में हुआ था। आग इतनी भीषण थी कि 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के समय इमारत में कई लोग मौजूद थे और आग तेजी से फैलने के कारण बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।
जांच में कई अधिकारियों की लापरवाही आई सामने
अलीगंज के पॉश इलाके में स्थित इस इमारत में कैफे और कोचिंग सेंटर संचालित होते थे। हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जांच रिपोर्ट में 19 इंजीनियरों और 6 PCS अधिकारियों की कथित लापरवाही सामने आई थी। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी। जांच एजेंसियां भवन निर्माण की स्वीकृति, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की भी जांच कर रही हैं।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने जताया था शोक
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचे थे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की थी।
अलीगंज अग्निकांड मामले में आरोपी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला की अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद जांच और न्यायिक प्रक्रिया ने नया मोड़ लिया है। यह मामला भवन सुरक्षा मानकों, प्रशासनिक जवाबदेही और अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अब आगे की सुनवाई और जांच के आधार पर मामले में अगली कानूनी कार्रवाई तय होगी।





