सीधी में सरकारी मानदेय घोटाले का आरोप, एक ही व्यक्ति कई विभागों से उठा रहा भुगतान, जांच शुरू

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सरकारी मानदेय भुगतान को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति एक साथ कई शासकीय विभागों में कार्यरत दिखाकर अलग-अलग जगहों से मानदेय प्राप्त कर रहा है। इस मामले में आजीविका मिशन और जिला पंचायत की सोशल ऑडिट शाखा सहित विभिन्न विभागों के 12 से अधिक अस्थायी कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की गई है। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
एक ही समय में कई विभागों में ड्यूटी का आरोप
शिकायत के अनुसार कुछ कर्मचारी आजीविका मिशन, जिला पंचायत की सोशल ऑडिट शाखा, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य योजनाओं में एक ही समय पर कार्यरत दिखाए गए हैं। जबकि इन सभी पदों की ड्यूटी का समय लगभग समान है। आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी विभिन्न विभागों से अलग-अलग मानदेय प्राप्त कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता संदीप सिंह गहरवार ने इस मामले की शिकायत जिला मुख्यालय से लेकर भोपाल तक की है।
32 दिन का कार्यदिवस दिखाकर मानदेय लेने का भी आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि एक कर्मचारी ने एक ही महीने में 32 कार्यदिवस दर्शाकर मानदेय प्राप्त किया। आरोप के मुताबिक उसने अलग-अलग योजनाओं के तहत 20 दिन, 10 दिन और 2 दिन का कार्य दिखाकर भुगतान लिया। साथ ही उसी अवधि में अन्य विभागों से भी मानदेय लेने की बात शिकायत में कही गई है।
इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल जांच के बाद ही होगी।
शिकायत में भाजपा की दो महिला पदाधिकारियों के नाम भी
इस मामले में भाजपा की जिला मंत्री उर्मिला साकेत और बरमबाबा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनीता गुप्ता के नाम भी शिकायत में शामिल हैं। आरोप है कि दोनों अलग-अलग विभागों से एक साथ मानदेय प्राप्त कर रही थीं।
इसके अलावा शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि एक महिला कर्मचारी दो अलग-अलग नामों और अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर दो स्थानों पर कार्यरत दिखाई गई है। इन आरोपों की सत्यता की जांच प्रशासन द्वारा की जा रही है।
जांच के आदेश, दोषी पाए जाने पर होगी वसूली और एफआईआर
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच अपर मुख्य कार्यपालन अधिकारी धनंजय मिश्रा को सौंपी गई है।
अपर सीईओ ने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों से सरकारी राशि की वसूली की जाएगी और उनके खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) भी दर्ज कराया जाएगा।
सीधी जिले में सामने आया यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।





