मध्य प्रदेश में UCC पर बढ़ी हलचल, CM मोहन यादव बोले- एक देश में अलग-अलग कानून नहीं हो सकते

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए कि राज्य सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक ही देश में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून होना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब UCC को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी तेज है।
कार्यक्रम में क्या बोले मुख्यमंत्री?
इंदौर में 300 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल के नए भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यदि एक व्यक्ति के लिए विवाह संबंधी नियम एक हैं, तो दूसरे व्यक्ति के लिए भी समान नियम होने चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून होने की व्यवस्था पर विचार करने की जरूरत है। यह उनके सार्वजनिक संबोधन का हिस्सा था।
UCC पर बनी समिति ने जुटाए सुझाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, ने प्रदेशभर में विभिन्न धर्मों, सामाजिक वर्गों और संगठनों से संवाद किया है। उनके अनुसार, समिति को 10 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। सरकार इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
मानसून सत्र में विधेयक आने की चर्चा
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होना प्रस्तावित है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस दौरान UCC से जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए विधेयक पेश होने को लेकर अंतिम स्थिति विधानसभा की कार्यवाही के दौरान ही स्पष्ट होगी।
कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने UCC के मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया और समिति की प्रक्रिया में भाग नहीं लिया। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से इस विषय पर अलग-अलग समय पर अपनी राजनीतिक और संवैधानिक आपत्तियां व्यक्त की जाती रही हैं। UCC को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग है।
UCC क्या है और क्यों है चर्चा में?
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। समर्थकों का मानना है कि इससे समानता और एकरूपता बढ़ेगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस विषय पर व्यापक सामाजिक संवाद और संवैधानिक संतुलन आवश्यक है। यही कारण है कि UCC लंबे समय से देश में बहस का विषय बना हुआ है।





