टेक्नोलॉजी

Digi Yatra में जुड़वां यात्रियों को हो रही परेशानी, फेस रिकग्निशन सिस्टम पर उठे सवाल

एयरपोर्ट पर लंबी कतारों से राहत देने और यात्रा को तेज बनाने के लिए शुरू की गई Digi Yatra सेवा अब कुछ यात्रियों के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है। खासकर एक जैसे दिखने वाले Identical Twins (जुड़वां भाई-बहन) को फेस रिकग्निशन सिस्टम सही तरीके से पहचानने में कठिनाई हो रही है। नतीजतन, फास्ट-ट्रैक एंट्री की सुविधा मिलने के बजाय उन्हें कई बार मैनुअल पहचान प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

अहमदाबाद के जुड़वां भाइयों ने उठाई आवाज

अहमदाबाद के रहने वाले जुड़वां भाई संजीव छाजेड़ और राजीव छाजेड़ ने इस समस्या को लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि जब भी दोनों साथ यात्रा करते हैं, Digi Yatra का फेस रिकग्निशन सिस्टम दोनों के चेहरे में अंतर नहीं कर पाता। इससे दोनों में से किसी एक की डिजिटल एंट्री रुक जाती है और उसे अलग से पहचान सत्यापन कराना पड़ता है।

फेस रिकग्निशन सिस्टम में कहां आ रही है दिक्कत?

संजीव छाजेड़ के अनुसार, सिस्टम कई बार उनके चेहरे को “Duplicate” या “Repeated Processing Attempt” के रूप में पहचानता है। उनका मानना है कि दोनों भाइयों के चेहरे बेहद मिलते-जुलते होने के कारण फेस रिकग्निशन एल्गोरिद्म भ्रमित हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि एक जैसे दिखने वाले जुड़वां यात्रियों के लिए अतिरिक्त सत्यापन या विशेष पहचान प्रक्रिया विकसित की जानी चाहिए।

यात्रा के दौरान सामने आई तकनीकी समस्या

संजीव ने बताया कि 10 जुलाई को अहमदाबाद से दिल्ली की उड़ान के दौरान Digi Yatra का उपयोग करते समय उनके मोबाइल पर “Too Many Access” का संदेश दिखाई दिया। उनके भाई को भी यही समस्या आई। इसके बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान भी दोनों में से एक यात्री को मैनुअल वेरिफिकेशन के लिए अलग लाइन में भेजा गया, जबकि दोनों पहले से Digi Yatra में पंजीकृत थे।

अन्य जुड़वां यात्रियों ने भी बताई यही परेशानी

ऐसी ही समस्या अहमदाबाद की जुड़वां बहनों केया पटेल और हिया पटेल ने भी बताई। उनके अनुसार, जब वे अलग-अलग यात्रा करती हैं तो Digi Yatra सामान्य रूप से काम करता है, लेकिन साथ यात्रा करने पर अक्सर किसी एक की पहचान नहीं हो पाती। उनकी मां का कहना है कि इस वजह से कई बार वे Digi Yatra का उपयोग ही नहीं करतीं और सीधे सामान्य सुरक्षा जांच का विकल्प चुनती हैं।

क्या होगा आगे?

फिलहाल एयरपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि उनके पास इस तरह की कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है और यह विषय नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा संबंधित तकनीकी एजेंसियों के स्तर पर जांच का है। यदि फेस रिकग्निशन तकनीक में ऐसी तकनीकी सीमाएं सामने आती हैं, तो विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सिस्टम को और बेहतर बनाने की आवश्यकता होगी, ताकि सभी यात्रियों को समान और सुगम अनुभव मिल सके।

Digi Yatra ने लाखों यात्रियों की एयरपोर्ट यात्रा को आसान बनाया है, लेकिन जुड़वां यात्रियों के सामने आई यह समस्या बताती है कि उन्नत तकनीक में भी सुधार की गुंजाइश रहती है। यदि इस तरह के मामलों का तकनीकी समाधान विकसित किया जाता है, तो फेस रिकग्निशन आधारित यात्रा प्रणाली और अधिक विश्वसनीय तथा समावेशी बन सकती है।

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