भोपालमध्य प्रदेशरीवा

बार-बार सिरमौर में तैनाती पर उठे सवाल: एसडीओपी रूपेंद्र की वापसी बनी चर्चा का विषय

रीवा। सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में एसडीओपी रूपेंद्र की एक बार फिर हुई पदस्थापना ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। हाल ही में जारी तबादला आदेश के बाद क्षेत्र में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि धुर्वे का नाम बार-बार इसी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ता रहा है। उनकी नई तैनाती को लेकर आमजन से लेकर सामाजिक संगठनों तक में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सुनाई दे रही हैं।

जानकारी के अनुसार रूपेंद्र धुर्वे ने अपने सेवाकाल के दौरान रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में परिवीक्षा अवधि के दौरान थाना प्रभारी के रूप में कार्य किया था। इसके बाद उन्हें एसडीओपी डभौरा के पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई। कुछ समय बाद उनका तबादला अलीराजपुर जिले में किया गया लेकिन वहां पदभार ग्रहण करने के बाद पुनः उनकी वापसी रीवा जिले के डभौरा क्षेत्र में कर दी गई। बाद में उन्हें बालाघाट जिले में पदस्थ किया गया, जहां उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं।

अब एक बार फिर उनका स्थानांतरण सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सिरमौर में किया गया है जिससे स्थानीय स्तर पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। लोगों का कहना है कि किसी अधिकारी का एक ही क्षेत्र या उससे जुड़े प्रशासनिक दायरे में बार-बार लौटना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि क्या यह केवल विभागीय आवश्यकता का परिणाम है या इसके पीछे अन्य कोई कारण भी है।

क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि शासन और पुलिस मुख्यालय को स्थानांतरण प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी को बार-बार एक ही क्षेत्र में पदस्थ किया जाता है तो इससे निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं। कई लोगों का यह भी मत है कि लंबे समय तक किसी क्षेत्र विशेष से जुड़े रहने पर स्थानीय स्तर पर प्रभाव और संबंध विकसित हो जाते हैं, जो प्रशासनिक निष्पक्षता की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि विभागीय स्तर पर इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि स्थानांतरण शासन का विशेषाधिकार होता है और यह कार्य आवश्यकता, अनुभव तथा उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर किया जाता है। फिर भी लगातार एक ही क्षेत्र से जुड़े तबादलों को लेकर जनचर्चा होना स्वाभाविक है।

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