मध्य प्रदेश में एथेनॉल के नाम पर सरकारी चावल घोटाला, SIT जांच में 1100 करोड़ की हेराफेरी की आशंका

मध्य प्रदेश के बालाघाट और सिवनी जिलों में सरकारी फोर्टिफाइड चावल की कथित हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को आशंका है कि एथेनॉल उत्पादन के नाम पर 17 जिलों के 22 एथेनॉल प्लांटों से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से लगभग 1100 करोड़ रुपये मूल्य के चावल की अनियमितता हुई हो सकती है। इस मामले में आठ राइस मिल संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि 13 मिल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है।
ट्रक पकड़ने से खुली पूरे नेटवर्क की परतें
पूरे मामले का खुलासा 3 जून को बालाघाट में 242 क्विंटल सरकारी चावल से भरे एक ट्रक के पकड़े जाने के बाद हुआ। जांच में सामने आया कि यह ट्रक एथेनॉल प्लांट पहुंचने के बजाय एक राइस मिल परिसर में मिला। इसके बाद पुलिस और SIT ने जांच का दायरा बढ़ाया। अब तक ट्रक चालक, एथेनॉल प्लांट से जुड़े एजेंट, सुपरवाइजर और एक ट्रांसपोर्टर को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं फरार राइस मिलर सौरभ संचेती और उनके पिता गंभीर संचेती की तलाश जारी है।
ऐसे किया गया कथित घोटाला
जांच एजेंसियों के अनुसार, सरकार की नीति के तहत एफसीआई गोदामों से पुराने फोर्टिफाइड चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजे जाने थे। आरोप है कि रास्ते में ही इन चावल से भरे ट्रकों को राइस मिलों में उतार दिया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर यही चावल नई पैकिंग के साथ कस्टम मिलिंग के चावल के रूप में सरकारी गोदामों में जमा कराया जाता था। जांच में ट्रांसपोर्टरों और कुछ राइस मिल संचालकों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है।
SIT की जांच जारी, कई लोगों से पूछताछ
बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के अनुसार, मामले की जांच के लिए गठित SIT अब तक 50 से अधिक ट्रांसपोर्टरों, ट्रक चालकों, राइस मिल संचालकों और एथेनॉल प्लांट से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस का मानना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और कथित हेराफेरी के तरीके से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।





