गोविंदगढ़ थाना प्रभारी का तबादला: पुलिस महकमे में फिर उठे सिफारिश और कार्यशैली पर सवाल

रीवा। गोविंदगढ़ थाना प्रभारी के हालिया तबादले को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पुलिस विभाग के इस प्रशासनिक निर्णय के बाद विभिन्न स्तरों पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह तबादला केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है या इसके पीछे किसी वरिष्ठ अधिकारी की नाराजगी अथवा सिफारिश संबंधी कारण भी हैं।
जनचर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व में मनगवां में पदस्थ रहे थाना प्रभारी गजेन्द्र धाकड़ को भी कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य नहीं करने के कारण वहां से हटाया गया था। हालांकि इन दावों की किसी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है लेकिन पुलिस महकमे में तबादलों को लेकर चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं।
गोविंदगढ़ थाना प्रभारी के स्थानांतरण को लेकर भी लोगों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों की कार्यशैली स्वतंत्र होती है उन्हें अक्सर ग्रामीण अथवा दूरस्थ क्षेत्रों में भेज दिया जाता है जबकि प्रभावशाली अधिकारियों के निकट रहने वाले कर्मचारियों को महत्वपूर्ण शहरी पदस्थापनाएं मिलती रहती हैं।
पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विशेष रूप से आईजी कार्यालय में पदस्थ एक उपनिरीक्षक को लेकर पूर्व में कई प्रकार की चर्चाएं सामने आई थीं। कुछ लोगों का आरोप है कि उक्त अधिकारी ने एक पत्रकार को नशे के कारोबार से जोड़ने का प्रयास किया था। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि उनके विरुद्ध पूर्व पदस्थापना के दौरान तस्करों से सांठगांठ के आरोप लगे थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एमडी ड्रग्स मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका पर उठे सवाल : लालगांव में पकड़े गए एमडी ड्रग्स मामले को लेकर अब कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। चर्चाओं के बीच यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि जिन उपनिरीक्षक और तीन आरक्षकों को आरोपियों को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, क्या उन्हें मामले की जानकारी पहले से थी और यदि थी तो शुरुआती स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लोगों द्वारा यह मांग की जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या अन्य प्रकार की चूक तो नहीं हुई। हालांकि, इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।





