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10 करोड़ की MD जब्ती के बाद नए सवाल: SP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले IG का बयान क्यों? कार्रवाई, दबाव और पर्दे के पीछे की कहानी पर चर्चा तेज

रीवा जिले के गढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम सोनवर्षा में 10 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही 3087 ग्राम एमडी ड्रग्स की बरामदगी और दो आरोपियों की गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। लेकिन इस कार्रवाई के सामने आते ही अब कई नए सवाल भी चर्चा का विषय बन गए हैं। न केवल कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर बल्कि पूरे घटनाक्रम के प्रस्तुतिकरण को लेकर भी आमजन और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पुलिस के अनुसार 6 जुलाई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सोनवर्षा निवासी मण्डप सिंह और ज्ञानभूषण शर्मा भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स लेकर बिक्री के लिए निकलने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 3087 ग्राम एमडी ड्रग्स तथा दो मोबाइल फोन बरामद किए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जिन पुलिसकर्मियों के नाम इस सफलता के साथ जोड़े जा रहे हैं उनमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं जिन पर पूर्व में विभागीय गोपनीयता भंग करने अथवा अन्य विवादों से जुड़े आरोप लग चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ किसी प्रकार की दोषसिद्धि सामने आई है फिर भी चर्चाओं का दौर जारी है।

इसी बीच एक और सवाल लोगों के बीच तेजी से उभर रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा इस मामले के खुलासे के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस निर्धारित की गई थी और मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित भी किया जा चुका था। इसके बावजूद निर्धारित समय से पहले ही रीवा रेंज के आईजी द्वारा एक निजी चैनल और यूट्यूब चैनल को बयान दिए जाने की चर्चा सामने आई है।

अब लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कुछ समय बाद होने वाली थी तब ऐसी कौन सी जल्दबाजी थी कि मामले की जानकारी पहले ही सार्वजनिक कर दी गई। कुछ लोग इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे अनावश्यक जल्दबाजी के रूप में देख रहे हैं। वहीं चर्चा यह भी है कि कहीं यह मुख्यमंत्री और पुलिस मुख्यालय स्तर पर अपनी सक्रियता प्रदर्शित करने की कोशिश तो नहीं थी। हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और न ही किसी अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया सामने आई है।

दूसरी ओर जिले में यह चर्चा भी लगातार सुनाई दे रही है कि हाल ही में चर्चित आदित्य मिश्रा प्रकरण के बाद पुलिस की कार्यशैली में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा है। लोगों का कहना है कि उस मामले के बाद नशे के कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क पर निगरानी बढ़ी है, जिसके चलते लगातार बड़ी कार्रवाइयां सामने आ रही हैं। वहीं कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अभी कहानी का पूरा सच सामने आना बाकी है और पर्दे के पीछे कई ऐसे पहलू हो सकते हैं जो जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे।

फिलहाल पुलिस इस जब्ती को नशे के खिलाफ बड़ी उपलब्धि मान रही है लेकिन जनता के बीच उठ रहे सवाल भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। आखिर यह बढ़ी हुई सक्रियता महज संयोग है बढ़ते दबाव का परिणाम है या फिर किसी बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की शुरुआत? इसका जवाब भविष्य की जांच और आगे होने वाली कार्रवाइयां ही देंगी। अभी के लिए इतना जरूर है कि 10 करोड़ की एमडी ड्रग्स जब्ती ने रीवा में नशे के कारोबार के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक समन्वय को भी बहस के केंद्र में ला दिया है।

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