
रीवा। मध्य प्रदेश में चल रहे आप की पुलिस आपके द्वार जैसे जनसंपर्क कार्यक्रमों को लेकर अब आम नागरिकों के बीच बहस तेज होती जा रही है। एक ओर पुलिस विभाग इन आयोजनों को जनता से संवाद विश्वास और कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल बता रहा है वहीं दूसरी ओर कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अपराध नियंत्रण लंबित मामलों के निराकरण और नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश के अनेक थानों में बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित हैं। उनका मानना है कि यदि पुलिस बल का अधिक समय और संसाधन विवेचना, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तथा अपराधियों के विरुद्ध अभियान में लगाया जाए तो आम जनता को उसका सीधा लाभ मिलेगा। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जनचौपाल जैसे कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं भी अक्सर थाना स्तर पर ही कराई जाती हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यदि इन आयोजनों के लिए अलग बजट उपलब्ध नहीं है तो व्यवस्थाओं का आर्थिक बोझ किस प्रकार वहन किया जाता है। इस विषय पर विभाग को पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने।
लोगों का कहना है कि पुलिस बल पहले से ही कई स्थानों पर सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बीच कार्य कर रहा है। ऐसे में कानून-व्यवस्था, विवेचना, गश्त, न्यायालयीन कार्य और जनसंपर्क कार्यक्रम सभी जिम्मेदारियों का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नागरिकों का सुझाव है कि जनसंपर्क के साथ-साथ प्रत्येक थाने में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, फरार आरोपियों की धरपकड़ और गंभीर अपराधों के त्वरित निराकरण पर विशेष अभियान चलाया जाए।
कुछ नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया कि चर्चित मामलों में यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो तो अपराधियों का मनोबल स्वतः कमजोर होगा। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई जितनी तेज और निर्णायक होगी अपराधियों को कानून से बच निकलने का अवसर उतना ही कम मिलेगा।
इसी के साथ शहर में बढ़ते नशे को लेकर भी लोगों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। नागरिकों का कहना है कि युवाओं को नशीली दवाओं कफ सिरप और अन्य मादक पदार्थों की गिरफ्त से बचाना आज सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों की मांग है कि ऐसे मामलों में छोटे विक्रेताओं तक सीमित रहने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच कर मुख्य तस्करों तक कार्रवाई पहुंचनी चाहिए। यदि कहीं अवैध बिक्री की शिकायतें हैं तो उनका सत्यापन कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनप्रतिनिधि समय-समय पर विकास सुशासन और नशामुक्त समाज की बात करते हैं। ऐसे में आम नागरिकों की अपेक्षा है कि पुलिस और प्रशासन भी अपराध नियंत्रण ,लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण नशे के अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई और जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। लोगों का मानना है कि जब थाने मजबूत होंगे अपराधियों पर समयबद्ध कार्रवाई होगी और आम नागरिक बिना भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे तभी पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और अधिक मजबूत होगा। जनचौपाल निश्चित रूप से उपयोगी पहल हो सकती है लेकिन उसकी सफलता का वास्तविक पैमाना वही होगा जब उसका प्रभाव थानों की कार्यप्रणाली अपराध नियंत्रण और जनता को मिलने वाले न्याय में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।





