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तबादला सूची पर बवाल: क्या उपमुख्यमंत्री को किया गया दरकिनार? जोनल अधिकारी के दबदबे से गरमाई सियासत और पुलिस महकमा

रीवा। जिले की बहुप्रतीक्षित पुलिस स्थानांतरण सूची जारी होते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर पुलिस विभाग और आम जन तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सूची सामने आते ही सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिले की पुलिस व्यवस्था में फैसला किसका चल रहा है जनप्रतिनिधियों का पुलिस अधीक्षक का या फिर जोन स्तर के किसी प्रभावशाली अधिकारी का?

सूत्रों की मानें तो करीब एक वर्ष पूर्व दूसरे जिले से आए एक उप निरीक्षक को स्वयं उपमुख्यमंत्री ने शहर क्षेत्र में पदस्थ कराने का भरोसा दिया था। पुलिस विभाग में यह चर्चा लंबे समय से थी कि अगली सूची में उन्हें शहर की जिम्मेदारी मिल जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या उपमुख्यमंत्री की सिफारिश भी प्रभावी नहीं रही या फिर कहीं और से आए दबाव ने पूरा समीकरण बदल दिया?

वहीं दूसरी ओर कुछ विधायकों की पसंद के अधिकारियों को मनचाहे क्षेत्रों में पदस्थ किए जाने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। गुढ़ सिरमौर और त्योंथर क्षेत्र में हुई कुछ नियुक्तियों को लेकर विभाग के भीतर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। दो माह पहले जिले में आए एक उप निरीक्षक द्वारा कथित रूप से यह कहा जाना कि मुझे तो गुढ़ विधानसभा ही जाना है अब विभागीय चर्चाओं का प्रमुख विषय बन गया है क्योंकि सूची में उनकी तैनाती उसी क्षेत्र में दिखाई दे रही है।

पुलिस महकमे में यह भी चर्चा है कि वर्तमान पुलिस अधीक्षक के कार्यभार संभालने के बाद एक जोनल अधिकारी का प्रभाव लगातार बढ़ा है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि उक्त अधिकारी ने अपनी पसंद की टीम तैयार करने और अपने निर्देशों को अंतिम मानने जैसे संदेश भी दिए थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन स्थानांतरण सूची के बाद इन चर्चाओं को नया बल जरूर मिला है।

सबसे ज्यादा नाराजगी उन अधिकारियों में बताई जा रही है जो वर्षों से जिले में पदस्थ हैं लेकिन आज तक उन्हें थाना प्रभारी बनने का अवसर नहीं मिला। वहीं कुछ ऐसे अधिकारियों के लगातार महत्वपूर्ण प्रभारों पर बने रहने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि योग्यता और कार्यक्षमता के बजाय केवल सिफारिश और प्रभाव के आधार पर पदस्थापनाएं होंगी तो इसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ना तय है।

सूची में लालगांव, सेमरिया और अन्य थाना क्षेत्रों में हुई नियुक्तियों को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। आम लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर किन उपलब्धियों के आधार पर कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

इधर आबकारी और अन्य विभागों में कथित मासिक वसूली तथा प्रतिशत कटौती को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय गलियारों में इन्हें लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सुनाई दे रही हैं।

फिलहाल एक बात साफ है कि स्थानांतरण सूची ने जिले की राजनीति और पुलिस महकमे में नई बहस छेड़ दी है। यदि चर्चाओं और आरोपों में सच्चाई है तो आने वाले दिनों में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। आखिरकार कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी जिले के पुलिस अधीक्षक पर ही होगी, जबकि फैसलों के पीछे बताए जा रहे प्रभावशाली चेहरे जवाबदेही के दायरे से बाहर रहेंगे।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह स्थानांतरण सूची जिले की पुलिस व्यवस्था को मजबूत करेगी या फिर विवादों और असंतोष का नया अध्याय लिखेगी।

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