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‘सतलुज’ फिल्म पर पंजाब में सियासी संग्राम, सुखबीर बादल बोले- हर गांव में होगी स्क्रीनिंग

जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। फिल्म के OTT प्लेटफॉर्म से हटने के बाद अब शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इसे पंजाब के हर गांव और शहर तक पहुंचाने का ऐलान किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा इतिहास की व्याख्या को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

सुखबीर सिंह बादल का बड़ा ऐलान

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की कि उनकी पार्टी फिल्म ‘सतलुज’ की स्क्रीनिंग पंजाब के हर गांव और कोने में करेगी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा और 1990 के दशक के पंजाब से जुड़े घटनाक्रम को सामने लाती है। बादल का कहना है कि नई पीढ़ी को उस दौर के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। यह उनका राजनीतिक पक्ष है।

OTT से हटने के बाद बढ़ा विवाद

फिल्म, जिसका पहले नाम ‘Punjab ’95’ था, 3 जुलाई को ZEE5 पर ‘सतलुज’ नाम से रिलीज हुई थी। हालांकि, दो दिन बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। फिल्म हटने के बाद पंजाब के कुछ इलाकों में सिख धार्मिक संगठनों और स्थानीय समूहों ने गुरुद्वारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर इसकी स्क्रीनिंग शुरू कर दी।

इतिहास और सेंसरशिप पर बहस

सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया कि फिल्म उस दौर की घटनाओं को सामने लाती है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास को छिपाने के बजाय आने वाली पीढ़ियों के सामने तथ्य रखे जाने चाहिए। यह उनका राजनीतिक बयान है।

दूसरी ओर, कई राजनीतिक दलों और सिख संगठनों ने भी फिल्म को हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतिहास से जुड़े विषयों पर खुली चर्चा होनी चाहिए।

केंद्र सरकार पर लगे आरोपों पर क्या बोले रवनीत सिंह बिट्टू?

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाने में केंद्र सरकार या भाजपा की भूमिका है। उन्होंने कहा कि फिल्म जिन घटनाओं पर आधारित है, वे उस समय की हैं जब पंजाब और केंद्र दोनों में कांग्रेस की सरकार थी। उनके अनुसार, भाजपा को इस मामले से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

समीक्षा समिति का गठन

पंजाब भाजपा के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने फिल्म को OTT से हटाए जाने के मामले की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। पार्टी का कहना है कि यह कदम पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की अपील के बाद उठाया गया। समिति की जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

कौन थे जसवंत सिंह खालरा?

फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। उन्होंने कथित तौर पर 1984 से 1994 के बीच पंजाब में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों की जांच की थी। वर्ष 1995 में उनके लापता होने के बाद यह मामला व्यापक चर्चा में आया। बाद में इस मामले में कुछ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया था।

‘सतलुज’ अब केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चल रही बहस का केंद्र बन चुकी है। जहां एक पक्ष इसे इतिहास से जुड़ी सच्चाइयों को सामने लाने का माध्यम बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष मामले को तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में देखने की बात कर रहा है। आने वाले दिनों में समीक्षा समिति की रिपोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा तय कर सकती हैं।

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