’70 साल का हो गया हूं, सठिया गया हूं…’, कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने खींचा सबका ध्यान

मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में कहा, “70 साल का हो गया हूं, यूं ही सठिया गया हूं… किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है।” उन्होंने यह भी कहा कि वे जो भी कहते हैं, सामने कहते हैं, पीठ पीछे नहीं। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए, जबकि राजनीतिक हलकों में इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।
‘जो सही है, वो सही… जो गलत है, वो गलत’
अपने संबोधन में विजयवर्गीय ने कहा कि उनकी कार्यशैली हमेशा स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखते हैं और सही-गलत के बीच समझौता नहीं करते। उनका कहना था कि यदि किसी को उनकी स्पष्टवादिता बुरी लगती है तो भी वे अपनी बात कहने से पीछे नहीं हटते।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
कैलाश विजयवर्गीय का राजनीतिक जीवन 1975 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से छात्र नेता के रूप में शुरू हुआ। इसके बाद वे 1983 में पहली बार इंदौर नगर निगम के पार्षद बने और वर्ष 2000 में इंदौर के महापौर (मेयर) चुने गए। नगर विकास से जुड़े उनके कार्यों की उस समय व्यापक चर्चा हुई।
विधानसभा में लगातार जीत और संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां
विजयवर्गीय ने 1990 में पहली बार विधायक का चुनाव जीता और इसके बाद कई चुनावों में लगातार जीत दर्ज की। मध्य प्रदेश सरकार में उन्होंने लोक निर्माण, उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और नगरीय प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी। हरियाणा विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रभारी के रूप में उनकी रणनीति को भाजपा की सफलता से जोड़ा गया। इसके बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया और पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की।
फिर मध्य प्रदेश की राजनीति में वापसी
करीब एक दशक बाद 2023 में कैलाश विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश की सक्रिय राजनीति में वापसी की और इंदौर-1 विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। वर्तमान में वे मोहन यादव सरकार में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं और राज्य सरकार के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
निष्कर्ष
कैलाश विजयवर्गीय का ’70 साल का हो गया हूं, सठिया गया हूं’ वाला बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि उन्होंने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, लेकिन उनकी स्पष्टवादिता और बेबाक शैली एक बार फिर सुर्खियों में आ गई। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक भूमिका के कारण उनके बयानों पर राजनीतिक विश्लेषकों की भी न





