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रीवा आरटीओ की कार्रवाई पर उठे सवाल, KCC कंपनी के 100 से अधिक वाहनों पर क्यों मेहरबान विभाग? स्लीपर बसों पर सख्ती, लेकिन KCC कंपनी के नियम विरुद्ध वाहनों पर खामोशी! रीवा आरटीओ की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल

रीवा क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा हाल ही में 9 अंतर्राज्यीय स्लीपर बसों के पंजीयन निलंबित किए जाने की कार्रवाई को विभाग बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर जिले में संचालित निर्माण कंपनियों के भारी वाहनों पर कार्रवाई न होने से विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। खास तौर पर रतहरा से चोरहटा तक सड़क निर्माण कार्य कर रही KCC कंपनी के वाहनों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

आरटीओ विभाग ने दावा किया कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाराणसी–नागपुर, प्रयागराज–इंदौर और प्रयागराज–रायपुर मार्ग से गुजरने वाली स्लीपर बसों की जांच की गई। जांच में कई बसों में Fire Alarm Detection System (FADS), Fire Detection and Suppression System (FDSS) और अन्य सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए। इसके बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में पंजीकृत कुल 9 बसों के रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिए गए।

लेकिन अब लोगों का आरोप है कि आरटीओ विभाग की यह कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है। स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि रीवा जिले में KCC कंपनी के लगभग 100 से अधिक भारी वाहन बिना वैध दस्तावेजों, अधूरी फिटनेस और नियम विरुद्ध तरीके से सड़कों पर दौड़ रहे हैं लेकिन विभागीय अधिकारी इन पर कार्रवाई करने के बजाय केवल कंपनी के प्लांट तक विजिट कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं।

लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद विभागीय अमला सड़क पर उतरकर वास्तविक जांच नहीं करता। आरोप है कि कंपनी के डंपर, हाईवा और भारी वाहन ओवरलोड होकर दिन-रात सड़कें नाप रहे हैं। कई वाहनों के नंबर स्पष्ट नहीं दिखते जबकि कुछ वाहनों के बीमा फिटनेस और परमिट को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई शून्य दिखाई देती है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यदि आरटीओ विभाग वास्तव में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर होता तो केवल बसों पर कार्रवाई कर वाहवाही लूटने के बजाय निर्माण कंपनियों के वाहनों की भी व्यापक जांच करता। लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर KCC कंपनी के वाहनों को किसका संरक्षण प्राप्त है जिसके चलते इतने बड़े स्तर पर कथित अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही।

सूत्रों की मानें तो विभागीय स्तर पर अवैध वसूली की चर्चाएं भी आम हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि सड़कों पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले भारी वाहनों पर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। वहीं आम वाहन चालकों और बस ऑपरेटरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर विभाग अपनी सख्ती दिखाने में लगा हुआ है।

रतहरा से चोरहटा तक बन रही सड़क में पहले भी घटिया डायवर्सन, ओवरलोड वाहनों और सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर सवाल उठ चुके हैं। कई बार हादसे होने के बाद भी जिम्मेदार विभागों की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है। अब आम जनता ने जिला प्रशासन और परिवहन आयुक्त से मांग की है कि KCC कंपनी के सभी वाहनों की निष्पक्ष जांच कर दस्तावेजों और फिटनेस की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रीवा आरटीओ की कार्रवाई केवल कागजों और प्रेस नोटों तक सीमित रहेगी या फिर जिले में कथित तौर पर बिना दस्तावेज दौड़ रहे 100 से अधिक भारी वाहनों पर भी सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी।

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