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सोन नदी पुल में करोड़ों का खेल या तकनीकी चूक? एक ही पुल में दो मानक, 32 एमएम बनाम 16 एमएम सरिया का खेल, भोपाल के निरीक्षण ने मचाया हड़कंप! डिजाइन पास करने वालों पर उठे सवाल, अब जिम्मेदारी तय करने में विभाग के छूट रहे पसीने

ब्योहारी। लगभग आधी सदी से सोन नदी पर स्थायी पुल का सपना देख रही पपौंध और आसपास की जनता के बीच इन दिनों एक नया सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे बहुप्रतीक्षित सोन नदी पुल निर्माण कार्य में कथित तकनीकी विसंगतियों और गुणवत्ता संबंधी सवालों ने पूरे प्रोजेक्ट को विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है। निर्माण स्थल से सामने आ रही जानकारियों और स्थानीय लोगों के आरोपों ने विभागीय अधिकारियों से लेकर निर्माण एजेंसियों तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

जानकारी के अनुसार सोन नदी के मुख्य पुल का निर्माण वीकेएमसीपीएल कंपनी द्वारा किया जा रहा है जबकि पुल को दोनों तरफ से जोड़ने वाली एप्रोच रोड रिटेनिंग वॉल एवं अन्य संरचनाओं का निर्माण दूसरे ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। आरोप है कि एक ही परियोजना में दो अलग-अलग तकनीकी मानकों का उपयोग किया गया है जिससे भविष्य में पुल की मजबूती और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

एक पुल… दो तकनीक… आखिर किसके आदेश पर?

स्थानीय लोगों और निर्माण कार्य से जुड़े जानकारों का दावा है कि मुख्य पुल निर्माण में जहां 32 एमएम सरिया गहरी पाइलिंग और उच्च तकनीकी मानकों का उपयोग किया गया है वहीं पुल को जोड़ने वाली संरचनाओं में कथित रूप से 16 एमएम सरिया और अपेक्षाकृत कम गहराई की पाइलिंग का उपयोग किया गया। बताया जा रहा है कि मुख्य संरचना में लगभग 30 मीटर तक पाइलिंग की गई है जबकि दूसरे हिस्से में यह गहराई काफी कम है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि दोनों हिस्से एक ही पुल परियोजना के अभिन्न अंग हैं तो तकनीकी मानकों में इतना बड़ा अंतर क्यों रखा गया? क्या अलग-अलग डिजाइन स्वीकृत किए गए थे या फिर निर्माण के दौरान मानकों से समझौता किया गया?

डिजाइन पास कैसे हुई?

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह बताया जा रहा है कि जिस डिजाइन और ड्राइंग के आधार पर निर्माण कार्य किया जा रहा था वह संबंधित तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्वीकृत की गई थी। ऐसे में यदि आज निर्माण गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं तो जिम्मेदारी केवल ठेकेदारों की ही नहीं बल्कि उन अधिकारियों की भी बनती है जिन्होंने इसे मंजूरी दी। क्षेत्र में चर्चा है कि करोड़ों रुपये का कार्य पूरा होने के बाद अब उसी डिजाइन पर सवाल उठ रहे हैं। यदि डिजाइन सही थी तो विवाद क्यों खड़ा हुआ और यदि डिजाइन में खामियां थीं तो उसे स्वीकृति किस आधार पर दी गई?

भोपाल से पहुंचे मुख्य अभियंता ने खोली परतें!

सूत्रों के अनुसार हाल ही में भोपाल से पहुंचे मुख्य अभियंता एवं निरीक्षण दल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कथित रूप से कई तकनीकी बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की गई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया। बताया जाता है कि निरीक्षण के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह निरीक्षण नहीं होता तो भविष्य में गंभीर तकनीकी समस्या या बड़ा हादसा भी सामने आ सकता था। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन निरीक्षण के बाद बढ़ी हलचल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जवाबदेही से बच पाएंगे जिम्मेदार?

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी कमी या गुणवत्ता से समझौता पाया जाता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? डिजाइन तैयार करने वाले अभियंता उसे स्वीकृति देने वाले अधिकारी गुणवत्ता परीक्षण करने वाली एजेंसी या फिर निर्माण कंपनी? पपौंध क्षेत्र की जनता का कहना है कि उन्होंने विकास के नाम पर जनप्रतिनिधियों को चुना है और अब उनकी प्राथमिकता है की सुरक्षित एवं मजबूत पुल का निर्माण हो। लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच गुणवत्ता परीक्षण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

सोन नदी पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि हजारों लोगों की वर्षों पुरानी उम्मीदों का प्रतीक है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य पर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि जनता को भविष्य में किसी खतरे का सामना न करना पड़े और 50 वर्षों का सपना भ्रष्टाचार लापरवाही या तकनीकी चूक की भेंट न चढ़ जाए।

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