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एक महीने तक खरीदी केंद्र में पड़ा रहा गेहूं, निकासी शुरू होते ही पहुंच गया किसान! रीवा में नान अधिकारियों की जांच भी सवालों के घेरे में

रीवा (निप्र)। जिले के ईटहा-हरिहरपुर खरीदी केंद्र से जुड़े कथित गेहूं निकासी मामले में हर दिन नए सवाल सामने आ रहे हैं। किसानों की उपज की सुरक्षा के लिए बनाए गए खरीदी केंद्रों में हुए घटनाक्रम ने न केवल समिति प्रबंधन बल्कि नान अधिकारियों की जांच प्रक्रिया को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि मामले में सामने आए तथ्यों की गहराई से जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल उस गेहूं को लेकर उठ रहा है जिसे अब कुछ लोग निजी किसान का अनाज बताने का प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि यह गेहूं वास्तव में किसी किसान का निजी अनाज था तो वह खरीदी केंद्र परिसर में एक महीने से अधिक समय तक कैसे पड़ा रहा? आखिर ऐसा कौन सा किसान होगा जो अपनी मेहनत की उपज को खरीदी केंद्र में छोड़कर महीनों तक उसकी सुध न ले और फिर तभी सामने आए जब अनाज की निकासी शुरू हो जाए?

ग्रामीणों का कहना है कि इस बिंदु पर नान अधिकारियों को विशेष रूप से जांच करनी चाहिए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि संबंधित किसान ने अनाज कब खरीदी केंद्र में रखा उसका कोई रिकॉर्ड है या नहीं और यदि वह निजी अनाज था तो उसे शासकीय खरीदी केंद्र में रखने की अनुमति किसने दी। लोगों का मानना है कि केवल मौखिक बयान के आधार पर पूरे मामले को समाप्त करना न्यायसंगत नहीं होगा।

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस रात पूरे घटनाक्रम की चर्चा शुरू हुई उसी दौरान खरीदी केंद्र से गेहूं को निजी घर में शिफ्ट करने का प्रयास किया जा रहा था। आरोप है कि खरीदी केंद्र प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर कथित रूप से उस अनाज को अपना बताकर एक निजी स्थान पर पहुंचाने में लगे थे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन क्षेत्रीय लोग इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अनाज वास्तव में समिति कर्मचारियों या किसी निजी व्यक्ति का था तो खरीदी केंद्र परिसर का उपयोग भंडारण के लिए क्यों किया गया? वहीं यदि वह शासकीय खरीदी का गेहूं था तो फिर उसे निजी घर में ले जाने का प्रयास किस उद्देश्य से किया जा रहा था? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका जवाब अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।

लोगों का आरोप है कि किसानों के नाम पर बचाव की कोशिश की जा रही है। कई किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्रों में अनियमितताओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं लेकिन हर बार जिम्मेदार लोगों को बचाने के प्रयास होते रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इस मामले में भी केवल औपचारिक जांच कर फाइल बंद कर दी गई तो किसानों का सरकारी खरीदी व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।

क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि खरीदी केंद्र के संपूर्ण रिकॉर्ड, तौल पर्चियां, स्टॉक रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि आखिर एक महीने से अधिक समय तक खरीदी केंद्र में रखा गया गेहूं किसका था और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।

अब जिले में चर्चा इस बात की है कि क्या प्रशासन केवल जांच तक सीमित रहेगा या फिर यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो खरीदी केंद्र प्रभारी संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई भी करेगा। किसान और आम नागरिक निष्पक्ष जांच के साथ जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसानों की उपज और सरकारी संसाधनों के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।

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