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रीवा के ईटहा-हरिहरपुर खरीदी केंद्र में गेहूं निकासी पर बवाल! ट्रैक्टर रोका गया, फिर भी नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी, उठे गंभीर सवाल

मीडिया ऑडीटर न्यूज। रीवा जिले के ईटहा-हरिहरपुर खरीदी केंद्र में सामने आए कथित गेहूं निकासी प्रकरण ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खरीदी केंद्र से गेहूं की संदिग्ध निकासी का खेल केवल रात के अंधेरे तक सीमित नहीं था बल्कि इसके प्रमाण दिन के उजाले में भी देखने को मिले। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और मौके से दूरी ने पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में रात के समय गेहूं लोड कर बाहर ले जाया गया। वहीं दूसरी ट्रॉली में सुबह फिर गेहूं लोड किए जाने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों और मीडिया कर्मियों को मामले की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही लोग मौके पर पहुंचे और संदिग्ध परिस्थितियों में खड़े ट्रैक्टर को रोक लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना देकर मौके पर बुलाने की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक्टर को रोकने के बाद घंटों तक प्रशासन के आने का इंतजार किया गया। लोगों को उम्मीद थी कि सूचना मिलते ही राजस्व, खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग या अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करेंगे। लेकिन आरोप है कि सुबह से लेकर देर शाम तक कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों का कहना है कि जब मामला शासकीय खरीदी केंद्र और किसानों की उपज से जुड़ा हो तब प्रशासन की ऐसी निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर ऐसा क्या कारण था कि सूचना मिलने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा।

क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि यदि किसी आम किसान या गरीब व्यक्ति के खिलाफ मामूली शिकायत मिलती है तो प्रशासन तत्काल सक्रिय हो जाता है लेकिन जब मामला खरीदी केंद्र और शासकीय गेहूं से जुड़ा हो तो जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी समझ से परे दिखाई देती है। इसी कारण अब लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासन ने पूरे मामले पर मौन सहमति दे रखी थी या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है।

मामले को लेकर सहकारिता विभाग नागरिक आपूर्ति निगम (नान) और अन्य संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि खरीदी केंद्र में रखे गेहूं की सुरक्षा और उसके लेखा-जोखा की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में यदि ट्रैक्टरों में गेहूं लोड हो रहा था तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं थी?

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि ट्रैक्टर में लोड किया जा रहा गेहूं किसका था उसे किसके आदेश पर ले जाया जा रहा था और खरीदी केंद्र परिसर में उसकी मौजूदगी का क्या आधार था। साथ ही यह भी जांच हो कि सूचना मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचने में रुचि क्यों नहीं दिखाई।

ईटहा-हरिहरपुर खरीदी केंद्र का यह मामला अब केवल कथित गेहूं निकासी तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। किसान और स्थानीय नागरिक अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर उनकी उपज की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और यदि किसी खरीदी केंद्र में अनियमितता की आशंका हो तो कार्रवाई कौन करेगा।

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