भोपालमध्य प्रदेशरीवा

गोविंदगढ़ थाने में अपराध दर्ज, फिर भी महीनों फरार रहा तस्कर ! शहडोल पुलिस के खौफ में भागे और कुएं में खत्म हुई कहानी, रीवा रेंज की बड़ी नाकामी उजागर

रीवा। रीवा रेंज में पुलिस व्यवस्था की बड़ी चूक एक बार फिर उजागर हुई है। गोविंदगढ़ थाने में अपराध दर्ज होने के बावजूद कुख्यात गांजा तस्कर रोहित शर्मा महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। हैरानी की बात यह है कि जिस आरोपी को रीवा पुलिस नहीं पकड़ पाई वही शहडोल पुलिस की सख्ती के डर से भागते हुए अपनी जान गंवा बैठा। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि पूरे रेंज में चल रहे तस्करी नेटवर्क की गंभीरता को भी सामने ला दिया है।

जानकारी के मुताबिक रोहित शर्मा के खिलाफ गोविंदगढ़ थाने में पहले से अपराध दर्ज था। इसके बावजूद उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। महीनों तक फरार रहने के बाद भी वह क्षेत्र में सक्रिय रहा और गांजा तस्करी के कारोबार को खुलेआम अंजाम देता रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसकी गतिविधियां किसी से छिपी नहीं थीं फिर भी पुलिस की पकड़ उससे दूर रही।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज था तो उसे गिरफ्तार करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई? क्या पुलिस की कोशिशें कमजोर थीं या फिर जानबूझकर मामले को नजरअंदाज किया गया?

घटना ने उस समय गंभीर मोड़ लिया जब शहडोल जिले में पुलिस गश्ती के दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस को देखकर वाहन सवार तस्कर घबरा गए और तेज रफ्तार में भागने लगे। इसी दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया लेकिन तस्कर वहां से भी नहीं रुके। घायल होने के बावजूद तीनों तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर खेतों की ओर भागे। बताया जा रहा है कि शहडोल पुलिस की सख्ती और गिरफ्तारी के डर से वे इतनी जल्दी में थे कि दिशा का अंदाजा नहीं लगा सके और पास के कुएं में जा गिरे।

अगली सुबह जब एक किसान ने कुएं में तीन शव तैरते देखे तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और तीनों शवों को बाहर निकाला। मृतकों की पहचान रोहित शर्मा तनुज शुक्ला और सचिन सिंह बघेल के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया कि तीनों गांजा तस्करी के नेटवर्क से जुड़े थे और घटना के समय भी बड़ी खेप के साथ सफर कर रहे थे।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू यह है कि गोविंदगढ़ थाने में अपराध दर्ज होने के बावजूद रोहित शर्मा पुलिस की पकड़ से बाहर कैसे रहा? यह सीधे तौर पर थाना स्तर की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है।

सूत्रों के अनुसार यदि समय रहते आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाता तो न केवल इस घटना को टाला जा सकता था बल्कि पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा भी संभव था। लेकिन कार्रवाई में हुई देरी ने न केवल आरोपी को सक्रिय बनाए रखा बल्कि अंततः यह घटना सामने आई। इस मामले ने रीवा रेंज के खुफिया तंत्र और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या उन्हें इस आरोपी की जानकारी नहीं थी? और अगर थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

NDPS एक्ट जैसे सख्त कानून के बावजूद तस्करों का बेखौफ होना यह दर्शाता है कि कानून का डर कहीं न कहीं खत्म हो चुका था। यह स्थिति केवल एक थाने की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता की ओर इशारा करती है।

फिलहाल पुलिस जांच की बात कर रही है लेकिन यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि एक चेतावनी है अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे नेटवर्क और भी मजबूत होते जाएंगे।

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